Strategic Partnership: पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के बीच रूस और चीन के विदेश मंत्रियों ने बीजिंग में मुलाकात की है। इस बैठक में पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करने और नई वैश्विक रणनीति बनाने पर जोर दिया गया है।
Global Tensions: दुनिया में जंगी तनाव के बीच जब पश्चिम एशिया में संकट गहराता जा रहा है और अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक नाकेबंदी कड़ी कर दी है, ऐसे में दो शक्तिशाली देशों रूस और चीन ने मौके का फायदा उठाते हुए अपने रणनीतिक रिश्ते और मजबूत कर लिए हैं। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में एक अहम बैठक कर चौंका दिया। इस इन दोनों दिग्गज नेताओं की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात हुई। बैठक के दौरान लावरोव ने पश्चिमी देशों (खासकर अमेरिका और यूरोप) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ कहा कि यूक्रेन का युद्ध पश्चिमी देशों की एक सोची-समझी साजिश है। उनका मकसद रूस को रणनीतिक रूप से हराना और यूरेशिया में एक नया 'आक्रामक गुट' बनाना है। लावरोव ने यह भी चेतावनी दी कि पश्चिमी देश छोटे गुट बना कर ताइवान, दक्षिण चीन सागर और कोरियाई प्रायद्वीप में भी शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं।
भले ही लावरोव और वांग यी इस साल पहली बार व्यक्तिगत तौर पर मिले हों, लेकिन दोनों देशों के बीच फोन पर लगातार बातचीत होती रही है। यह बैठक दरअसल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली आगामी भव्य शिखर वार्ता की जमीन तैयार करने के लिए की गई है।
रूस और चीन ने एक बार फिर दोहराया है कि उनकी दोस्ती की 'कोई सीमा नहीं' है। दोनों देशों ने मध्य पूर्व में पश्चिमी दखलंदाजी का विरोध किया और एक नई 'यूरेशियन सुरक्षा व्यवस्था' बनाने पर सहमति जताई। यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मॉस्को और बीजिंग अब अमेरिका केंद्रित विश्व व्यवस्था को चुनौती देने के लिए पूरी तरह से एकजुट हो चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि यह बैठक अमेरिका और नाटो के लिए एक खुला संदेश है। रूस और चीन अब दुनिया के हर कोने में ' चाहे वह पश्चिम एशिया हो या इंडो-पैसिफिक' अमेरिकी फैसलों को संयुक्त रूप से चुनौती देने का मन बना चुके हैं। इस कूटनीतिक बैठक के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी शिखर वार्ता पर टिक गई हैं। उम्मीद है कि इस शीर्ष बैठक में कई बड़े रक्षा, व्यापारिक और ऊर्जा समझौतों पर अंतिम मुहर लगेगी, जो पश्चिमी प्रतिबंधों की धार को और कुंद कर देंगे।
एक तरफ जहां पूरी दुनिया और पश्चिमी मीडिया का ध्यान इजरायल, हमास और ईरान के बीच चल रहे विवाद पर केंद्रित है, वहीं रूस और चीन इस मौके का फायदा उठाकर एशिया और मध्य पूर्व में अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत कर रहे हैं। अमेरिका की व्यस्तता का फायदा उठाकर ये दोनों देश 'ग्लोबल साउथ' में अपना दबदबा बढ़ा रहे हैं। ( इनपुट: ANI)