Hajj Quota Crisis 2025: पाकिस्तान के हजारों यात्री इस साल हज यात्रा से वंचित रह गए हैं।
Hajj Quota Crisis 2025: प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स की लापरवाही और अनदेखी की वजह से इस साल हज़ारों पाकिस्तानी हज 2025 (Hajj 2025) पर नहीं जा सकेंगे। पाकिस्तान के संघीय मंत्री सरदार यूसुफ ने यह खुलासा किया है। ग्लोबल टाइम्स मीडिया यूरोप के अनुसार इस्लामाबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री सरदार यूसुफ ने बताया कि पाकिस्तान का कुल हज कोटा (Pakistan Hajj 2025) 1,79,000 था, जिसमें से आधा यानी 50% सरकारी स्कीम के तहत और शेष प्राइवेट सेक्टर को दिया गया था। सरकार की ओर से संचालित स्कीम में सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी की गईं, लेकिन प्राइवेट ऑपरेटर्स (Private tour operator negligence) ने समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए।
मंत्री ने बताया कि सऊदी सरकार ने 14 फरवरी तक प्राइवेट टूर ऑपरेटरों को कुल लागत की 25% राशि जमा करवाने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने यह निर्देश नजरअंदाज कर दिया। बाद में सऊदी अधिकारियों ने एक हफ्ते की अतिरिक्त मोहलत दी, जिसे भी गंभीरता से नहीं लिया गया।
जब यह मामला पाकिस्तान सरकार को पता चला, तो सऊदी अरब से और समय मांगा गया, लेकिन सऊदी नीति पूरी दुनिया के लिए समान होती है, इसलिए बहुत अधिक रियायत नहीं दी जा सकी। हालांकि, पाकिस्तान की गुज़ारिश पर प्राइवेट सेक्टर को 10,000 यात्रियों का कोटा दिया गया, और इस साल 25,698 लोग निजी स्कीम से हज पर जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की ओर से एक जांच समिति बनाई गई है, और सिफारिशों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने यह भी बताया कि 31 मई तक हज की फ्लाइट्स जारी रहेंगी। सरकारी कोटे के तहत जाने वाले यात्रियों को अज़ीज़िया
कैटेगिरी में ठहराया गया है। सभी हज यात्रियों को समान और बेहतर सुविधाएं देने के लिए निजी सेवा प्रदाताओं को निर्देश जारी किए गए हैं। ध्यान रहे कि यह मामला पाकिस्तान में प्राइवेट हज ऑपरेटरों की जवाबदेही और नियमन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रधानमंत्री की जांच समिति अगले सप्ताह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप सकती है। प्रभावित हज यात्रियों को मुआवजा या रिफंड देने पर विचार चल रहा है। सरकार 2026 से पहले प्राइवेट हज लाइसेंसिंग नियमों को फिर से तय करने की तैयारी कर रही है।
अज़ीज़िया (Azizia) मक्का शरीफ़ के पास एक रिहायशी इलाका (Residential Area) है, जहां हज के दौरान सरकारी योजना के तहत ज्यादातर हाजी रुक जाते हैं। यह हरम शरीफ मस्जिद अल-हरम से लगभग 7–10 किलोमीटर दूर है। यहां की रिहाइश सस्ती होती है और बस शटल सेवा से हरम तक ले जाया जाता है। सुविधाएं सीमित होती हैं, लेकिन व्यवस्थित और सुरक्षित होती हैं।
पाकिस्तान में इस घटना को लेकर जनता में भारी रोष है। सोशल मीडिया पर लोग हज मंत्रालय से पूछ रहे हैं कि इतनी बड़ी लापरवाही पहले क्यों नहीं पकड़ी गई? विपक्षी दलों ने इस घटना को “हज मैनेजमेंट फेल्योर” कहा है और प्राइवेट ऑपरेटरों की मॉनिटरिंग सिस्टम पर सवाल उठाए हैं।
कई प्राइवेट ऑपरेटरों ने सरकार को ही दोषी ठहराया है, उनका कहना है कि हज पोर्टल और पेमेंट गेटवे समय पर काम नहीं कर रहे थे। यह विवाद सरकारी बनाम निजी मॉडल की बहस को और तीखा बना रहा है।