इजराइल अमेरिका ईरान युद्ध: ब्रिटेन ने 40 देशों की बैठक बुलाई, लेकिन इससे युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट खोलने का कोई हल नहीं निकला। भारत के पूर्व राजनयिक केपी फाबियन बोले- ईरान जो गारंटी मांग रहा है वो कोई नहीं दे सकता।
Iran–Israel war: ब्रिटेन ने 40 देशों को एक साथ बिठाया, बड़ी-बड़ी बातें हुईं, लेकिन जमीन पर कुछ बदलेगा, इसकी उम्मीद कम है। भारत के पूर्व राजनयिक केपी फाबियन ने साफ कह दिया है कि इन बैठकों से शायद ही कोई नतीजा निकल पाए।
फाबियन ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि अगर ये 40 देश ईरान से कहें कि होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait latest news Hindi) खोलो, तो ईरान का जवाब होगा- हां, हम खोलने को तैयार हैं। लेकिन पहले अमेरिका और इजराइल यह गारंटी दें कि वो दोबारा हम पर हमला नहीं करेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि यही वो जगह है जहां ब्रिटेन समेत सभी 40 देश फंस जाते हैं। क्योंकि अमेरिका और इजरायल की तरफ से ऐसी कोई गारंटी देना किसी के बस की बात नहीं।
फाबियन ने यह भी कहा कि सैन्य स्तर पर भी कोई खास काम नहीं हो सकता। बैठक के आयोजकों ने कहा था कि कूटनीति से काम होगा, लेकिन बाद में सैन्य बैठक की बात भी आई। फाबियन के मुताबिक, सैन्य मोर्चे पर भी ज्यादा कुछ हासिल नहीं होगा।
होर्मुज स्ट्रेट वो रास्ता है जिससे दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल लेता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला तेल इसी रास्ते से बाकी दुनिया तक पहुंचता है। जब से यह बंद हुआ है, तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं और दुनियाभर में माल की आवाजाही पर असर पड़ा है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इस बंदी की वजह से इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमले हो रहे हैं और खतरा इतना बड़ा है कि लगभग सारी आवाजाही रुक गई है।
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने गुरुवार को हुई इस वर्चुअल बैठक में ईरान पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ईरान ने दुनिया के इस जरूरी समुद्री रास्ते को बंधक बना लिया है और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल दिया है। कूपर ने कहा कि ईरान की इस हरकत से सिर्फ तेल महंगा नहीं हुआ, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक सुरक्षा खतरे में है।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जो जंग चल रही है, उसका असर अब सिर्फ उन तीन देशों तक नहीं रहा। होर्मुज बंद होने से पूरी दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ रहा है।
ऐसे में 40 देशों की यह बैठक कितनी कारगर होगी, यह देखने वाली बात है। फाबियन की बात मानें तो जब तक अमेरिका और इजराइल कोई ठोस गारंटी नहीं देते, ईरान का रुख नहीं बदलेगा और होर्मुज का रास्ता बंद रहेगा।