
यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) और सरकारी सेना के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। दोनों पक्ष अक्सर ही एक-दूसरे पर हमले करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में हूतियों का प्रभाव तेज़ी से बढ़ा है और ऐसे में उनके हमलों में भी इजाफा हुआ है। गुरुवार को हूतियों ने एक बार फिर यमन की सरकारी सेना को निशाना बनाया। इन विद्रोहियों ने यमन की सरकारी सेना के शिविरों पर हमला किया।
हूतियों ने गुरुवार को मरीब और हदरामौत में यमन की सरकारी सेना के शिविरों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन्स दागे। बताया जा रहा है कि हूतियों ने 8 मिसाइलें दागीं और कई ड्रोन्स लॉन्च किए। हूती विद्रोहियों के इस हमले से यमन के सैन्य शिविरों में हाहाकार मच गया और भीषण तबाही देखने की मिली। यह हमला 2022 के अनौपचारिक सीज़फायर के बाद सबसे घातक हमलों में से एक है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह सीज़फायर कुछ समय के बाद ही टूट गया था।
मरीब और हदरामौत में यमन की सरकारी सेना के शिविरों पर हूतियों के हमले में 38 सैनिकों की मौत हो गई। पहले मरने वाले सैनिकों की संख्या 30 बताई जा रही थी, जो बाद में बढ़कर 38 हो गई। अभी मरने वाले सैनिकों की संख्या का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि हूती विद्रोहियों का हमला काफी घातक था। इस हमले के लिए आत्मघाती ड्रोन्स के साथ ही बैलिस्टिक मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया गया। हमले के बाद हूतियों ने आधिकारिक रूप से इसकी ज़िम्मेदारी भी ली है।
हूतियों के इस हमले में यमन की सरकारी सेना के 50 से ज़्यादा सैनिक घायल हो गए। घायल सैनिकों को नज़दीकी सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। इनमें से कई घायलों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
हूती विद्रोहियों का दावा है कि उनके हमले में सैकड़ों यमनी सैनिक मारे गए या घायल हुए। इतना ही नहीं, इस हमले में यमन की सरकारी सेना के शिविरों, हथियार डिपो और वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।