
Iran Nuclear Deal : अमेरिका बोला- बातचीत करनी है तो शर्त मानो (फोटो सोर्स:@USAmbUN)
Iran Nuclear Deal: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने अपना रुख और स्पष्ट कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। इसके लिए वॉशिंगटन ‘अधिकतम दबाव’ जारी रखेगा। हालांकि, इसी कड़े संदेश के बीच तेहरान के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा गया है। शर्त सिर्फ इतनी है कि ईरान वार्ता में गंभीरता और सद्भावना के साथ लौटे।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच वॉशिंगटन ने अपनी रणनीति का दोहरा संदेश दिया है परमाणु हथियार के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं, लेकिन कूटनीतिक बातचीत की संभावना बरकरार। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित हैं।
Al-Monitor की 20 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम में वॉल्ट्ज ने कहा कि यदि ईरान गंभीरता से बातचीत की मेज पर लौटता है तो संवाद का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में भी इसी रुख को दोहराया
वॉल्ट्ज ने ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव को दशकों पुराने संघर्ष की निरंतरता के रूप में पेश किया। उनके बयान में खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का उल्लेख हुआ, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसी चिंता को वॉल्ट्ज पहले भी सार्वजनिक रूप से उठा चुके हैं।
इस विवाद की जड़ें 2015 के JCPOA यानी ईरान परमाणु समझौते तक जाती हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के साथ हुए इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कई सीमाएं लगाई गई थीं और उसके बदले प्रतिबंधों में राहत का प्रावधान था। अमेरिकी ट्रेजरी रिकॉर्ड के मुताबिक समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण गतिविधियों तक सीमित रखना था।
लेकिन 2018 में ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर दिया और परमाणु संबंधी प्रतिबंध दोबारा लागू किए। इसके बाद ईरान ने भी समझौते की कई सीमाओं से हटना शुरू किया।
अब हालात और जटिल हो चुके हैं। सितंबर 2026 में रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान पर प्रतिबंधों की स्वतंत्र निगरानी जारी रखने संबंधी अमेरिकी समर्थित प्रस्ताव को वीटो कर दिया। इससे परमाणु विवाद पर अंतरराष्ट्रीय सहमति की चुनौती भी सामने आई है।
तेहरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के लिए नहीं है। ऐसे में वॉल्ट्ज का ताजा बयान यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन एक तरफ आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य की बातचीत के लिए चैनल पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता।
Updated on:
21 Sept 2026 09:33 am
Published on:
21 Sept 2026 09:26 am
