
US Defense: भारतीय वायुसेना के प्रमुख अमर प्रीत सिंह ने अपने मौजूदा अमेरिकी दौरे के दौरान एक ऐतिहासिक और बेहद अहम कदम उठाया है। अमेरिकी डिफेंस पार्टनरशिप को और भी अधिक मजबूत करते हुए, वायुसेना प्रमुख ने नेवादा के नेलिस एयर फोर्स बेस में अमेरिका के सबसे उन्नत और खतरनाक बोइंग F-15EX लड़ाकू विमान में उड़ान भरी है। यह उड़ान सिर्फ एक सामान्य अभ्यास नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए दोनों देशों की मजबूत होती दोस्ती का बड़ा संकेत है।
वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह ने यह खास उड़ान 9 अप्रैल को 85वीं टेस्ट एंड इवैल्यूएशन स्क्वाड्रन के अनुभवी पायलट, मेजर मैथ्यू बेन्सन के साथ भरी। इस अनुभव ने इंडियन एयरफोर्स चीफ को अमेरिकी बेड़े के इस सबसे आधुनिक विमान की ताकत, रफ्तार और तकनीक को बेहद करीब से समझने का शानदार मौका दिया। अमेरिकी वायुसेना इस विमान को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है।
की ओर से बनाया गया F-15EX पुराने F-15 जेट का सबसे नया और अपग्रेडेड वर्जन है। इसकी खूबियां इसे आसमान का असली सिकंदर बनाती हैं:
रफ्तार और ऊंचाई: यह मैक 2.5 की टॉप स्पीड से उड़ सकता है और 50,000 फीट की ऊंचाई तक जाने में सक्षम है।
हथियारों का जखीरा: यह विमान एक साथ 12 AMRAAM मिसाइलें ले जा सकता है। यह 13,381 किलोग्राम तक का भारी पेलोड उठा सकता है और हाइपरसोनिक हथियारों को भी सपोर्ट करता है।
अत्याधुनिक तकनीक: इसमें डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल, फुल-ग्लास कॉकपिट, AESA रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से बचने के लिए EPAWSS सिस्टम लगा है, जो इसे दुश्मन के इलाके में भी सुरक्षित और मारक बनाता है।
अपनी यात्रा के दौरान 10 अप्रेल को वायुसेना प्रमुख ने पेंटागन में अमेरिकी वायुसेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल केन विल्सबैक और वायुसेना सचिव ट्रॉय मींक से खास मुलाकात की। इन बैठकों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त युद्ध अभ्यास को बढ़ाने और तकनीक साझा करने पर चर्चा हुई। अमेरिका ने भारत द्वारा एमक्यू-9बी स्काई गार्डियन ड्रोन की खरीद का भी स्वागत किया है, जो भारतीय सशस्त्र बलों की निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय वायुसेना प्रमुख का F-15EX में उड़ान भरना एक स्पष्ट कूटनीतिक और सामरिक संदेश है। यह चीन जैसे देशों को यह जताने के लिए काफी है कि भारत और अमेरिका की वायुसेनाएं अब तक के सबसे मजबूत अंतर-संचालनीयता स्तर पर काम कर रही हैं। इस दौरे के बाद, भारत और अमेरिका के बीच होने वाले आगामी सैन्य अभ्यासों (जैसे रेड फ्लैग या कोप इंडिया) में दोनों वायुसेनाओं के बीच नए स्तर का तालमेल देखने को मिल सकता है। साथ ही, MQ-9B ड्रोन की डिलीवरी के बाद भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण का अगला चरण शुरू होगा, जिस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
हालांकि भारत अभी F-15EX नहीं खरीद रहा है, लेकिन अमेरिका के इस टॉप-टियर विमान की तकनीक और इसके ओपन-आर्किटेक्चर सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली को समझने से भारत को अपने स्वदेशी 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हो सकती है।