
Houthi attack Riyadh: सऊदी अरब की राजधानी रियाद एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव के केंद्र में आ गई है। यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अन्य नागरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद पूरे पश्चिम एशिया में चिंता की लहर दौड़ गई है।
मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण रियाद एयरपोर्ट पर भारी नुकसान की खबर है, जबकि हवाई सेवाएं बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई हैं। इस घटना ने न केवल सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ान नेटवर्क की संवेदनशीलता को भी उजागर कर दिया है।
हमलों का दायरा केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा। रियाद के साथ-साथ आभा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी हूती हमले हुए, जिससे यह साफ हो गया कि विद्रोही नागरिक बुनियादी ढांचे को सीधे निशाना बना रहे हैं। हवाई अड्डे जैसे ठिकानों पर हमले का सीधा असर आम यात्रियों, उड़ान संचालन और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी नाराजगी है।
हमलों के बाद भारत ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने रियाद और आभा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हुए हूती हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। मंत्रालय ने साफ कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भारत ने इस कठिन घड़ी में सऊदी अरब की सरकार और वहां की जनता के साथ एकजुटता जताई। भारत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए क्षेत्र की स्थिरता नई दिल्ली के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इन हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे 'भयानक घटना' करार देते हुए हूती विद्रोहियों के खिलाफ पलटवार के संकेत दिए। ट्रंप के बयान से यह अंदेशा गहरा गया है कि अमेरिका हूती ठिकानों के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से दी गई चेतावनी को क्षेत्र में तनाव बढ़ने के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।