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Venezuelan Oil पर भारत का बड़ा फैसला: ट्रंप के दावों के बीच विदेश मंत्रालय ने कहा- ‘सस्ता मिलेगा तो जरूर खरीदेंगे’

Foreign Policy: वैश्विक राजनीति में भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हालिया दावों के बीच भारत सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी (Donald Trump India Claim) है। मामला वेनेजुएला से तेल खरीदने (India Venezuela Oil Trade) का […]

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Feb 05, 2026
Representative Image (File Photo/ANI)

Foreign Policy: वैश्विक राजनीति में भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हालिया दावों के बीच भारत सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी (Donald Trump India Claim) है। मामला वेनेजुएला से तेल खरीदने (India Venezuela Oil Trade) का है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA Statement on Oil) ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतें (India Energy Security) पूरी करने के लिए किसी देश के दबाव में नहीं आएगा, बल्कि वहां से तेल खरीदेगा, जहां उसे सबसे ज्यादा आर्थिक फायदा होगा।

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क्या था डोनाल्ड ट्रंप का दावा ?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी चुनावी मुहिम के दौरान एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने 'लिक्विड गोल्ड' यानि कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर अमेरिका की क्षमता पर बात की थी। ट्रंप का कहना था कि अगर वे सत्ता में वापस आते हैं, तो अमेरिका में तेल का उत्पादन इतना बढ़ा देंगे कि भारत और चीन जैसे देशों को वेनेजुएला या ईरान जैसे अमेरिका-विरोधी देशों से तेल खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। ट्रंप के बयान का मतलब साफ था कि वे चाहते हैं कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका पर निर्भर रहे और वेनेजुएला जैसे प्रतिबंधित देशों से दूर रहे।

विदेश मंत्रालय का करारा जवाब

ट्रंप के इन बयानों के बीच, जब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से साप्ताहिक प्रेस वार्ता में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत सधा हुआ लेकिन कड़ा जवाब दिया। जायसवाल ने कहा, "हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर फैसले लेते हैं।"

उपलब्ध सस्ते विकल्पों के आधार पर तेल आयात का फैसला

उन्होंने आगे समझाया कि भारत की रिफाइनरियों की तकनीकी जरूरतों और बाजार में उपलब्ध सस्ते विकल्पों के आधार पर ही तेल आयात का फैसला होता है। आसान भाषा में कहें तो, विदेश मंत्रालय ने यह संदेश दिया है कि अगर वेनेजुएला से सस्ता और अच्छी क्वालिटी का तेल मिलेगा, तो भारत उसे खरीदने से पीछे नहीं हटेगा, चाहे अमेरिका का रुख कुछ भी हो।

वेनेजुएला और भारत का पुराना रिश्ता

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है। एक समय था जब भारत वेनेजुएला से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था। रिलायंस और नायरा एनर्जी जैसी भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल (Heavy Crude) बहुत उपयुक्त माना जाता है। लेकिन अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर कड़े प्रतिबंध लगाने के बाद भारत को वहां से खरीद बंद करनी पड़ी थी।

भारत पुराने विकल्पों पर विचार कर रहा

अब जब अमेरिका ने कुछ शर्तों के साथ प्रतिबंधों में ढील दी है, तो भारत फिर से पुराने विकल्पों पर विचार कर रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। ऐसे में, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जैसे भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपनी जनता को महंगाई से बचाया, वैसे ही वेनेजुएला के मामले में भी भारत 'कंट्री फर्स्ट' (Country First) की नीति अपना रहा है।

140 करोड़ नागरिकों के हित सर्वोपरि

भारत का यह रुख बताता है कि अब नई दिल्ली के फैसले वाशिंगटन या किसी और राजधानी के बयानों से तय नहीं होते। विदेश मंत्रालय का बयान यह संकेत है कि भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखता है और जहां सस्ता तेल मिलेगा, भारत की डील वहीं पक्की होगी।

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