India-US agreement: भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है। यह साझेदारी खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग को मजबूत करेगी और चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।
India-US critical minerals: भारत और अमेरिका ने मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई, खनन और प्रोसेसिंग को सुरक्षित करने के लिए एक अहम समझौता किया है। इस कदम को चीन पर निर्भरता कम करने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक प्रयास माना जा रहा है। दोनों देश इस क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे, जिससे हाई-टेक, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा करते हुए इसे मौजूदा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बताया। यह घोषणा द्विपक्षीय वार्ता और क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद की गई।
उन्होंने कहा, 'आज हम महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ्स की आपूर्ति, खनन और प्रोसेसिंग को सुरक्षित करने के लिए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि क्वाड बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया था। उनके अनुसार, इन संसाधनों को सुरक्षित करना बेहद समयानुकूल और महत्वपूर्ण है, चाहे इसे द्विपक्षीय स्तर पर किया जाए, क्वाड के माध्यम से या समान विचारधारा वाले देशों के बड़े समूह के साथ। यह फ्रेमवर्क महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ्स की पूरी सप्लाई चेन में व्यापक सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। जयशंकर के मुताबिक, इस साझेदारी में खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और संबंधित निवेश शामिल होंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी भारत के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का ठोस उदाहरण है। रूबियो ने कहा, 'मैं पिछले कुछ दिनों से अपने दौरे के दौरान लगातार अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक गठबंधन के महत्व की बात कर रहा हूं। आज का यह समझौता उसका ठोस उदाहरण है।' उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों की रणनीतिक रुचि इस बात में है कि उन्हें लंबे समय तक महत्वपूर्ण खनिजों और सप्लाई चेन तक भरोसेमंद पहुंच मिलती रहे, जो उनकी नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वर्तमान में दुनिया में लगभग 85–90% रेयर अर्थ प्रोसेसिंग पर चीन का दबदबा माना जाता है, जिससे वैश्विक सप्लाई जोखिम में रहती है। इस साझेदारी से खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग में संयुक्त निवेश बढ़ेगा। इससे इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर एनर्जी, सेमीकंडक्टर और डिफेंस सेक्टर को स्थिर आपूर्ति मिलेगी। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में मांग 2–3 गुना तक बढ़ सकती है। यह समझौता न केवल सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा देगा।