नेपाल और भारत के बीच संबंध हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, जिसमें सीमा विवाद और राजनीतिक तनाव शामिल हैं। फिर भी, जमीनी स्तर पर भारत की निरंतर मदद जारी है।
पड़ोसी देशों से रिश्ते सिर्फ बातों से नहीं बनते, जमीन पर काम करने से बनते हैं। भारत ने एक बार फिर यही साबित किया है। नेपाल में नए बालेन शाह के पद संभालते ही भारत के लिए बड़ी खबर है।
काठमांडू में भारतीय दूतावास ने गुरुवार को नेपाल सरकार के साथ 7 नए विकास प्रोजेक्ट के लिए समझौते किए। इन प्रोजेक्ट पर करीब 473 मिलियन नेपाली रुपये खर्च होंगे और इससे नेपाल के सात अलग अलग जिलों के आम लोगों को फायदा मिलेगा।
ये सात प्रोजेक्ट नवलपुर, तेरहथुम, मुस्तांग, कैलाली, रौतहट, डोल्पा और बांके जिले में चलाए जाएंगे। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में काम होगा। यानी स्कूल बनेंगे, स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी और किसानों को मदद मिलेगी।
खास बात यह है कि इन सभी प्रोजेक्ट को नेपाल की स्थानीय सरकारें यानी नगरपालिकाएं और ग्रामीण नगरपालिकाएं खुद लागू करेंगी। भारत पैसा देगा लेकिन काम नेपाल के अपने लोग करेंगे।
यह कोई नई शुरुआत नहीं है। भारत 2003 से नेपाल में इस तरह के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट यानी HICDP चला रहा है। अब तक कुल 598 प्रोजेक्ट शुरू किए जा चुके हैं जिनमें से 506 पूरे हो चुके हैं।
यह काम नेपाल के सभी 7 प्रांतों में हुआ है। स्वास्थ्य, शिक्षा, खेती, पीने का पानी, सड़क, साफ सफाई और सार्वजनिक सुविधाएं, इन सब क्षेत्रों में भारत की मदद से काम हुआ है।
नेपाल और भारत के बीच रिश्ते हमेशा से उतार चढ़ाव वाले रहे हैं। कभी सीमा विवाद, कभी राजनीतिक तनाव। लेकिन जमीनी स्तर पर भारत की मदद लगातार जारी रही है।
स्कूल में पढ़ने वाला नेपाली बच्चा, अस्पताल में इलाज कराने वाला मरीज, खेत में काम करने वाला किसान, इन सबके जीवन में भारत की इस मदद का असर दिखता है।
बता दें कि नेपाल में हाल ही में आम चुनाव हुए जिसमें रबी लामिछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 275 में से 182 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल की। पुरानी पार्टियां बुरी तरह हारीं और नई सरकार बन गई।