कई भारतीय मछुआरे अपनी सज़ा पूरी करने के बावजूद पाकिस्तान की जेल में कैद हैं। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच समुद्री सीमा में मछली पकड़ने गए सैकड़ों भारतीय मछुआरे अक्सर अनजाने में अन्तर्राष्ट्रीय जल सीमा पार कर पाकिस्तानी हिरासत में पहुंच जाते हैं। इसके बाद वो कई वर्षों जेल की सलाखों के पीछे रहने को मजबूर होते हैं। 1 जनवरी को दोनों देशों ने 2008 के कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत कैदियों और मछुआरों की नवीनतम सूची साझा की है। इस सूची के अनुसार पाकिस्तान की जेलों में 199 भारतीय मछुआरे और 58 नागरिक कैदी हैं।
सूची में से 167 भारतीयों ने सज़ा पूरी कर ली है। फिर भी उनकी रिहाई का इंतजार लंबा होता जा रहा है। भारत ने सज़ा पूरी कर चुके लोगों की तत्काल रिहाई और स्वदेश वापसी की मांग की है।
पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए गुजरात के समुद्री श्रमिक सुरक्षा संघ, कोडिनार के प्रमुख बालूभाई सोचा ने गुजरात सरकार और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। कैद मछुआरों की परिजन महिलाओं ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की और जेलों में बंद मछुआरों की दयनीय स्थिति की जानकारी देते हुए उनकी रिहाई के लिए ठोस प्रयास करने की अपील की।
2025 में हुए 'पहलगाम आतंकी हमले' (Pahalgam Terrorist Attack) ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को गहरे तनाव में डाल दिया। इस हमले के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) चलाया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव हुआ। हालांकि टकराव समाप्त हो गया, लेकिन राजनयिक संबंध ठंडे पड़ गए हैं। इस तनाव का सीधा असर कैदियों और मछुआरों की रिहाई पर पड़ा है।