पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सतर्क हो गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका और खाड़ी देशों से बातचीत कर ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा पर चर्चा की। सरकार ने भारतीयों की सुरक्षा और आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।
Iran Israel War Latest News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब सिर्फ उस इलाके तक सीमित नहीं रहा है। इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में भारत सरकार सतर्क हो गई है और हर स्तर पर हालात पर नजर बनाए हुए है। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से लंबी बातचीत की। यह बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें खास तौर पर पश्चिम एशिया के संघर्ष और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर चर्चा हुई। खासकर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दोनों नेताओं ने चिंता जताई और आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति बनी।
इसके अलावा जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों के राजदूतों से भी मुलाकात की। इस बैठक में सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन के प्रतिनिधि शामिल थे। बातचीत का केंद्र पश्चिम एशिया का बदलता हालात और उसका असर रहा रहा।
जयशंकर ने इन देशों का धन्यवाद भी किया, खासकर वहां रहने वाले भारतीयों के प्रति उनके सहयोग के लिए। यह बात अहम है क्योंकि इन देशों में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जिनमें से सिर्फ सऊदी अरब और यूएई में ही लगभग 80 लाख लोग रहते हैं।दरअसल, हालात इसलिए ज्यादा गंभीर हो गए हैं क्योंकि हाल ही में इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद तनाव तेजी से बढ़ा है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी है। खासतौर पर खाद्य, ईंधन की उपलब्धता को लेकर।
सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए पहले ही कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई और जरूरी तैयारियों पर जोर दिया गया। कोशिश यही है कि देश की जरूरतें किसी भी हालत में प्रभावित न हों—चाहे वह आज की बात हो या भविष्य की। इधर भारत अपने पड़ोसी देशों की भी मदद पर विचार कर रहा है। श्रीलंका ने ईंधन की अतिरिक्त आपूर्ति की मांग की है, क्योंकि वहां भी इस संकट का असर दिखने लगा है। जयशंकर ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष से बात कर इस मुद्दे पर चर्चा की और भरोसा दिलाया कि भारत अपने ‘पड़ोसी पहले’ नीति पर कायम है।