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समंदर से आसमान तक भारत-अमेरिका साथ-साथ: क्या दोनों की ताकत से ड्रैगन की हर चाल होगी नाकाम!

Indo-Pacific: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हवाई में अमेरिकी सैन्य कमांडरों से मुलाकात कर सुरक्षा रणनीतियों पर अहम चर्चा की। इस दौरे ने दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को एक नई और मजबूत ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
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Apr 21, 2026
US-India Defense Power

Strategic Synergy: भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अब एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी हाल ही में अमेरिका के हवाई स्थित फोर्ट शैफ्टर पहुंचे, जहां उनका बेहद भव्य स्वागत किया गया। अमेरिकी सेना प्रशांत के इस अहम बेस पर उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच तेजी से बढ़ती सैन्य दोस्ती का एक बड़ा सुबूत है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर विशेष फोकस

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस दौरान यूएसएआरपीएसी के कमांडिंग जनरल, रोनाल्ड पी. क्लार्क और अन्य बड़े अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत की। एडीजीपीआई (ADGPI) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा का एक साझा ढांचा तैयार करना था। दोनों देशों की सेनाएं इस बात पर सहमत हैं कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना बेहद जरूरी है।

हवाई दौरे में देखी अमेरिकी सेना की ताकत

बंद कमरों की बैठकों के अलावा, सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने ओआहू द्वीप का एक हवाई सर्वेक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी सेना के ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहद करीब से देखा। इसमें घने जंगलों में युद्ध लड़ने की ट्रेनिंग, तटीय सुरक्षा के तरीके और कई मोर्चों पर एक साथ निपटने की तैयारियां शामिल थीं। इस दौरे से भारतीय सेना प्रमुख को यह समझने का मौका मिला कि अमेरिकी फौज जमीन, हवा, पानी, साइबर और अंतरिक्ष की ताकतों को एक साथ मिलाकर कैसे दुश्मनों पर हावी होती है।

वायुसेना प्रमुख की यात्रा भी बहुत खास

जनरल द्विवेदी की इस अहम यात्रा से ठीक पहले, 10 अप्रेल को भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी अमेरिका के दौरे पर थे। पेंटागन में अमेरिकी वायु सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल केन विल्सबैक ने उनका स्वागत किया था। इस दौरान भी दोनों देशों ने एक मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत की। अमेरिकी अधिकारियों ने भारत के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास की जमकर तारीफ की।

ड्रोन डील और फाइटर जेट में उड़ान

अमेरिका ने भारत द्वारा एमक्यू-9बी स्काई गार्जियन ड्रोन खरीदने के फैसले का भी खुलकर स्वागत किया है। अमेरिका ने भरोसा दिलाया है कि भारतीय सेना इन ड्रोन्स का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल कर सके, इसके लिए वह पूरा सपोर्ट देगा। इतना ही नहीं, अपनी यात्रा के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने नेवादा के नेलिस एयरफोर्स बेस पर अमेरिका के सबसे एडवांस लड़ाकू विमानों में से एक, बोइंग एफ-15ईएक्स ईगल II में भी उड़ान भरी। यह भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण में अमेरिकी सहयोग का एक जीता-जागता उदाहरण है।

अमेरिका भारत को अपना सबसे बड़ा और भरोसेमंद सैन्य साझीदार मानता है

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय थल सेना और वायु सेना प्रमुखों का यह बैक-टू-बैक अमेरिकी दौरा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका भारत को एशिया में अब अपना सबसे बड़ा और भरोसेमंद सैन्य साझीदार मानता है। अब रक्षा जगत की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन उच्च स्तरीय वार्ताओं के बाद भारत और अमेरिका के बीच हथियार निर्माण और तकनीकी हस्तांतरण को लेकर कौन से नए रक्षा समझौते सामने आते हैं।

चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में छोटे देशों को डराने की कोशिश कर रहा

एक पहलू यह है कि चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लगातार अपनी सैन्य ताकत दिखाकर छोटे देशों को डराने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत और अमेरिका की सेनाओं का यह जबरदस्त तालमेल सीधे तौर पर चीन की विस्तारवादी नीतियों को काउंटर करने का एक बड़ा और रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है। (इनपुट : ANI )



Updated on:
21 Apr 2026 06:34 pm
Published on:
21 Apr 2026 06:25 pm