विदेश

ईरान ने दबाई दुनिया की नस !100 डॉलर के पार पंहुचा कच्चा तेल, ट्रंप की धमकी के बीच एशियाई देशों के लिए बड़ी टेंशन

Trump Iran War Energy Crisis: ईरान- अमेरिका जंग के बीच हॉर्मुज की नाकाबंदी ने दुनिया को डरा दिया है। भारत के लिए यह संकट यूरोप से कहीं ज्यादा बड़ा है।
2 min read
Apr 06, 2026
Iran attacks Kuwait
कुवैत की तेल रिफाइनरी पर ईरान का हमला (फोटो- Mario Nawfal एक्स पोस्ट)

Trump Iran War Energy Crisis: अमेरिका और इजरायल के साथ चल रही जंग के बीच ईरान ने 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की जो घेराबंदी की है, वह केवल राजनीति नहीं, बल्कि दुनिया की आर्थिक कमर तोड़ने की तैयारी है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और गैस इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया है कि वे अब दूसरों की लड़ाई नहीं लड़ेंगे। इस संकट की सबसे बड़ी मार यूरोप पर नहीं, बल्कि भारत और चीन जैसे एशियाई देशों पर पड़ने वाली है।

एशियाई देशों के लिए यह बड़ी मुसीबत

आंकड़े के अनुसार, यूरोप अपनी जरूरत का केवल 6 से 7% कच्चा तेल और 7 से 9% नैचुरल गैस (LNG) ही इस रास्ते से मंगवाता है। 2024 के डेटा के मुताबिक, हॉर्मुज से निकलने वाले कुल तेल का मात्र 5% ही यूरोप जाता है। सबसे बड़ी मुसीबत एशियाई देशों के लिए है। हॉर्मुज से निकलने वाले कुल कच्चे तेल का 84% और गैस का 83% हिस्सा सीधे एशिया आता है। इसमें भारत और चीन सबसे बड़े खरीदार हैं। इसके अलावा जापान और दक्षिण कोरिया की ऊर्जा जरूरतें भी इसी रास्ते पर टिकी हैं। यानी अगर ईरान ने यह रास्ता पूरी तरह ठप किया, तो यूरोप में शायद केवल डीजल और जेट फ्यूल की किल्लत हो, लेकिन एशिया में तो पूरी अर्थव्यवस्था ही थम सकती है।

खुद समंदर में उतरकर अपना हक छीनो

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा है कि जो देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका का मुंह ताक रहे हैं, उन्हें अब खुद मैदान में उतरना होगा। ब्रिटेन जैसे देश जो कल तक ईरान के खिलाफ कार्रवाई से बच रहे थे, अब तेल के लिए रो रहे हैं। मेरा मशवरा है कि या तो हमसे (अमेरिका से) तेल खरीदो या फिर खुद समंदर में उतरकर अपना हक छीन लो।

भारत के लिए भी बढ़ी टेंशन

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। हॉर्मुज का रास्ता बंद होने का मतलब है सप्लाई में भारी कमी और कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी। भले ही यूरोप को इस रास्ते से कम तेल मिलता हो, लेकिन जब ग्लोबल मार्केट में सप्लाई गिरती है, तो कीमतें सबके लिए बढ़ती हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है, जो युद्ध से पहले की तुलना में 50% ज्यादा है।

40 देशों की गुप्त बैठक

ब्रिटेन और फ्रांस कूटनीति के जरिए ईरान को मनाने की कोशिश में हैं। 40 देशों की एक गुप्त बैठक भी हुई है जिसमें भारत भी शामिल था। कोशिश यह है कि प्रतिबंधों में ढील या सुरक्षा गारंटी देकर ईरान को रास्ता खोलने के लिए मनाया जाए।

ईरान की टोल वसूली और सौदेबाजी

ईरान को पता है कि उसके हाथ में दुनिया की नस है। वह इस रास्ते को सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल कर रहा है। सूत्रों के अनुसार कुछ जहाजों से निकलने के बदले लाखों डॉलर की वसूली कर रहा है। ईरान चाहता है कि दुनिया उसे एक क्षेत्रीय शक्ति माने और उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटा ले।

Updated on:
06 Apr 2026 10:29 pm
Published on:
06 Apr 2026 10:29 pm