Iran UAE War: संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कम से कम 20 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों और 37 ड्रोनों ने संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाया है। मंत्रालय ने बताया कि सभी हमलों को नाकाम कर दिया गया है।
Iran Ballistic Missile Attack: अमेरिका-इजरायल और ईरान में बीच जारी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे है कि अगले 10 दिन यानी 6 अप्रैल तक हमला नहीं करेंगे। लेकिन दूसरी तरफ वे ईरान को धमकियां दे रहा है। इसी बीच खबर आ रही है कि ईरानी सेना ने शनिवार को 20 बैलिस्टिक मिसाइलों और 37 ड्रोन से संयुक्त अरब अमीरात पर हमला किया। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने इसका दावा किया है। इसके साथ ही मंत्रालय ने बताया कि सभी हमलों को नाकाम कर दिया गया है।
शनिवार के हमलों के साथ ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत के बाद से खाड़ी देश पर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों की कुल संख्या 398, क्रूज मिसाइलों की संख्या 15 और ड्रोन हमलों की संख्या 1,872 हो गई है।
इन हमलों में सशस्त्र बलों के दो जवान, सशस्त्र बलों द्वारा अनुबंधित एक मोरक्को नागरिक और पाकिस्तानी, नेपाली, बांग्लादेशी, फिलिस्तीनी और भारतीय नागरिकों के आठ लोग शहीद हो गए। कम से कम 178 लोग घायल हुए हैं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि उसने देश के दक्षिणी प्रांत फार्स में 120 क्लस्टर बमों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय कर दिया है। ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने फार्स में आईआरजीसी के जनसंपर्क उप प्रमुख के हवाले से बताया कि कुछ दिन पहले काफ्री गांव और आसपास के इलाकों में अमेरिकी-इजरायली हमलों के दौरान ये गोला-बारूद गिराए गए थे।
ईरान में बीते 672 घंटों से डिजिटल ब्लैकआउट जारी है। निगरानी समूह नेटब्लॉक्स का कहना है कि इंटरनेट पर पाबंदी लगी- जो अमेरिकी-इजरायली हमलों के शुरू होने के बाद ईरानी अधिकारियों द्वारा पूरे देश में लगाई गई थी। अब इसे एक महीने के लिए बढ़ा दी गई है।
उन्होंने आगे कहा कि ठीक एक महीने पहले शनिवार की सुबह 28 फरवरी को ईरान में डिजिटल अंधकार छा गया क्योंकि अधिकारियों ने वैश्विक इंटरनेट तक पहुंच बंद कर दी थी। पूरे चार सप्ताह यानी 672 घंटे बीत जाने के बाद भी यह ब्लैकआउट जारी है। इससे ईरानियों के संवाद करने और जानकारी प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। इंटरनेट की कमी के कारण आम नागरिकों के लिए बातचीत करना और आने वाले हमलों के बारे में सतर्क रहना मुश्किल हो जाता है।