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क्या फेल हो जाएगा ‘पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता’? ईरान के हमले के बाद शहबाज शरीफ के सामने खड़ा हुआ सबसे बड़ा संकट

ईरान द्वारा सऊदी अरब के प्रमुख तेल ठिकानों और अरामको रिफाइनरी पर किए गए मिसाइल हमलों ने मिडिल ईस्ट में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। इस हमले के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच 2025 में एक रक्षा समझौता हुआ था।

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Mar 02, 2026
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। (फोटो- IANS)

Iran Attack Saudi Arabia Aramco: ईरान की जवाबी ड्रोन और मिसाइल हमलों ने सऊदी अरब के प्रमुख शहरों और अरामको के रास तनूरा रिफाइनरी को निशाना बनाया है। 2 मार्च को ईरान ने रियाद, दम्माम और रास तनूरा (550,000 बैरल/दिन क्षमता) पर हमला किया, जहां ड्रोन से छोटी आग लगी और रिफाइनरी अस्थायी रूप से बंद हो गई। सऊदी पैट्रियट सिस्टम ने ज्यादातर हमलों को रोक लिया, लेकिन धुआं और तबाही की तस्वीरें वायरल हैं। यह हमला अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों और आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या के जवाब में हुआ, जिससे तेल की कीमतें 10-15% बढ़ गईं।

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पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते पर सवाल

सितंबर 2025 में हस्ताक्षरित स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) में कहा गया है कि एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा। यह समझौता दशकों पुराने सैन्य संबंधों (ट्रेनिंग, संयुक्त अभ्यास) को मजबूत करता है, जिसमें खुफिया साझेदारी, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और संयुक्त उत्पादन शामिल हैं। हालांकि, इसमें परमाणु गारंटी स्पष्ट नहीं है - पाकिस्तान का फोकस भारत पर है, और समझौता मुख्य रूप से पारंपरिक सहयोग पर केंद्रित है।

शहबाज ने दी प्रिंस सलमान से बात

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की और X पर लिखा, 'मैंने अपने प्रिय भाई क्राउन प्रिंस से बात की… ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करता हूं। पाकिस्तान सऊदी अरब और खाड़ी देशों के साथ पूर्ण एकजुटता में खड़ा है। हम शांति के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार हैं, और उम्मीद है कि रमजान शांति लाएगा।'

शरीफ के सामने सबसे बड़ा संकट

पाकिस्तान ने ईरान के 'खतरनाक एस्केलेशन' की निंदा की और 'पूर्ण एकजुटता' जताई, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप का कोई संकेत नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौता NATO जैसा नहीं है - यह राजनीतिक और रणनीतिक साझेदारी ज्यादा है। रिटायर्ड मेजर जनरल राजन कोचर ने कहा, 'पाकिस्तान कोई सैन्य भागीदारी नहीं करेगा। उसके पास अफगानिस्तान, TTP और BLA से पर्याप्त समस्याएं हैं। यह पाकिस्तानी नेतृत्व के दोहरे मापदंडों को फिर उजागर करता है।'

बर्बादी की कगार पर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमजोर है, बहु-मोर्चा युद्ध का खतरा है, और ईरान के साथ सीमा साझा होने से जटिलताएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पाकिस्तान कूटनीति, लॉजिस्टिक सपोर्ट, ओवरफ्लाइट अधिकार या खुफिया मदद तक सीमित रहेगा - बूट्स ऑन ग्राउंड या जेट्स नहीं भेजेगा।

क्या समझौता फेल हो जाएगा?

यह संकट SMDA की असली परीक्षा है। अगर सऊदी आधिकारिक रूप से मदद मांगता है, तो पाकिस्तान को फैसला करना होगा - लेकिन घरेलू संकट और क्षेत्रीय जोखिमों के कारण सीमित प्रतिक्रिया संभावित है। इससे समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है, और रमजान के दौरान शांति की उम्मीद कमजोर पड़ रही है।

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