
Iran Cyber Security: ईरान इस समय दो मोर्चों पर चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ देश पर लगातार साइबर हमले हो रहे हैं। दूसरी तरफ होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा गरमाया हुआ है। इस बीच ईरान के मंत्री ने कहा है कि साइबर हमलों से निपटने के लिए टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। वहीं, ईरान और ओमान ने स्ट्रेट के रास्ते जहाजों की आवाजाही को लेकर एक अहम समझौते की दिशा में कदम बढ़ाया है।
ईरान के इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी मंत्री सत्तार हाशमी ने रविवार को साइबर हमलों को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसे हालात के बीच देश लगातार साइबर हमलों का सामना कर रहा है।
हाशमी के मुताबिक, इन हमलों से निपटने के लिए साइबर विशेषज्ञ चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के युवा और विशेषज्ञ इन हमलों को प्रभावी और सुरक्षित तरीके से संभाल रहे हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि साइबर हमलों का तरीका समय के साथ बदल रहा है। हमले पहले की तुलना में ज्यादा जटिल हो सकते हैं। हालांकि, ईरान के पास ऐसे हमलों से निपटने का पुराना अनुभव भी है। उनका दावा है कि पिछले हमलों के दौरान जरूरी सेवाओं को बड़े स्तर पर बाधित नहीं होने दिया गया। साथ ही हमलावरों के मकसद को भी नाकाम किया गया।
साइबर हमलों के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी गतिविधियां तेज हैं। शनिवार को ईरान और ओमान शिपिंग रूट से जुड़े एक अहम मुद्दे पर सहमत हुए। दोनों देशों ने स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक “शिपिंग मैप” पर सहमति बनाई है। हालांकि, अभी कई तकनीकी मुद्दों पर बातचीत बाकी है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, आने वाली बातचीत में बाकी तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी। दोनों देश अपने-अपने हितों और अधिकारों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहे हैं।
वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि पिछले तीन हफ्तों से बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि कई मुद्दों पर प्रगति हुई है। लेकिन दोनों देशों का संयुक्त बयान अभी अंतिम रूप नहीं ले सका है।
बघाई के मुताबिक, संयुक्त बयान से जुड़े कुछ मामलों पर अभी चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि समझौता अंतिम होने के बाद इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना है। साथ ही ईरान और ओमान की संप्रभुता और अधिकारों को बनाए रखना भी इसका हिस्सा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि जहाजों से ट्रांजिट फीस ली जाएगी या सुरक्षा के लिए कौन से इंतजाम किए जाएंगे। सबसे अहम बात यह है कि शिपिंग रूट पर बनी सहमति का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट तुरंत सामान्य व्यापारिक आवाजाही के लिए पूरी तरह खुल गया है। आगे की बातचीत के बाद ही तस्वीर और साफ होगी।