ईरान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जहां कंपनियां बंद हो रही हैं, महंगाई करीब 72% तक पहुंच गई है और हजारों लोग बेरोजगार होकर प्रभावित हुए हैं। युद्ध और प्रतिबंधों के कारण उद्योग, रोजगार और सप्लाई चेन बुरी तरह टूट गए हैं।
Iran Economy Crisis: ईरान में आर्थिक संकट (Economic Crisis) अपने सबसे खराब दौर में पहुंच गया है जहां महंगाई 72 प्रतिशत (Dearness) तक बढ़ चुकी है और आम लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लाखों लोगों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बढ़ती कीमतों ने देश का बजट बिगाड़ दिया है और जरूरी सामान भी पहुंच से बाहर हो गया है। ईरान में 23000 से ज्यादा कंपनियां और फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं जिससे करीब 10 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि हालात नहीं सुधरे तो 41 लाख और लोग गरीबी में जा सकते हैं और देश अब गहरे संकट में फंस जा रहा है।
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में थी। साल 2012 में प्रति व्यक्ति आय लगभग 8000 डॉलर थी, जो साल 2024 तक घटकर करीब 5000 डॉलर रह गई। इसकी वजह महंगाई, भ्रष्टाचार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध रहे। अब युद्ध जैसे हालात ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अनुसार इस युद्ध के कारण लगभग 41 लाख लोग और गरीबी में जा सकते हैं। हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाई से भारी नुकसान हुआ है, जिससे तेल रिफाइनरी, टेक्सटाइल, ट्रांसपोर्ट और मीडिया जैसे अहम सेक्टर भी प्रभावित हुए हैं। अब तक 23,000 से अधिक फैक्ट्रियां और कंपनियां इस संकट की चपेट में आ चुकी हैं। इसके अलावा युद्ध के चलते करीब 10 लाख नौकरियां सीधे खत्म हो गई हैं, जबकि लगभग 10 लाख लोग अप्रत्यक्ष रूप से बेरोजगार हो गए हैं, जिससे आर्थिक स्थिति और ज्यादा गंभीर होती जा रही है।
देश में महंगाई दर मार्च में 72 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि जरूरी चीजों की कीमतें इससे भी ज्यादा बढ़ी हैं। कई कंपनियां काम बंद करने पर मजबूर हैं क्योंकि मांग घट गई है और लागत बढ़ गई है।
हमलों के बाद कई बड़े औद्योगिक प्लांट बंद हो गए और कुछ सीमित हो गए हैं। ट्रेलर बनाने वाली एक कंपनी ने 1500 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है, जबकि एक बड़ी टेक्सटाइल कंपनी ने 700 लोगों की छंटनी की है। इसके अलावा पैकेजिंग की कमी के कारण कई डेयरी यूनिट्स भी बंद हो गई हैं। इस पूरे संकट का असर केवल इन कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे सप्लाई चेन में फैल गया है, जिससे उत्पादन और सप्लाई दोनों पर गंभीर दबाव पड़ गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में करीब 1,47,000 लोग बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन कर चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। सबसे ज्यादा असर असंगठित क्षेत्र और मिड-स्किल कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
घर से काम करने वाली महिलाओं के लिए हालात और मुश्किल हैं। इस संकट में बेरोजगारी भत्ते के लगभग एक-तिहाई आवेदन महिलाओं से आए हैं। ऑनलाइन टीचिंग, फ्रीलांसिंग और डिजिटल काम सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। तेहरान की फ्रीलांस डिजाइनर ने बताया की वे पहले विदेश से लगातार काम पाती थीं। लेकिन पिछले कई हफ्तों से इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के बाद उनकी पूरी कमाई रुक गई है। वे बताती हैं, 'न नए प्रोजेक्ट आ रहे हैं, न जवाब मिल रहे हैं। सब अचानक रुक गया है। यह कहानी सिर्फ असल की नहीं है, बल्कि लाखों ईरानियों की है, जिनकी डिजिटल कमाई अब ठप हो चुकी है।