
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के उप प्रतिनिधि मोहम्मद हुसैन जियाएनिया। (फोटो: ANI)
Tension: भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के डिप्टी प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियाएनिया ने उन सभी अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि देश के भीतर भारी तनाव और राजनीतिक कलह का माहौल है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान की जनता पूरी तरह से एकजुट है। पश्चिमी मीडिया की ओर से फैलाई जा रही अफवाहों पर करारा जवाब देते हुए जियाएनिया ने कहा कि ईरान की शासन व्यवस्था किसी एक शख्स की मोहताज नहीं है। यह एक मजबूत गणतंत्र प्रणाली है, जो जनता के भरोसे और एकता के दम पर चलती है।
जियाएनिया ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि जो लोग ईरान के टूटने या बिखरने की बात कर रहे हैं, वे या तो वहां के सरकारी सिस्टम को बिल्कुल नहीं समझते या फिर जानबूझकर दुनिया से सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि ईरान में एक पूरा पदानुक्रम काम करता है। किसी एक नेता के न होने से देश खत्म नहीं हो जाएगा। उन्होंने माना कि एक साल पहले दुश्मनों के लगाए गए अनुचित प्रतिबंधों के कारण देश में थोड़ी बहुत आर्थिक परेशानियां और असहमति जरूर थी, लेकिन मौजूदा युद्ध के बाद पूरा देश एक साथ खड़ा हो गया है। जनता अब समझ चुकी है कि उनकी समस्याओं की असली जड़ बाहरी ताकतें हैं।
जब उनसे अमेरिका और इजरायल के साथ हुए हालिया संघर्ष और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के पलटवार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से आत्मरक्षा करार दिया। जियाएनिया ने तीखा सवाल किया कि क्या ईरान को तब चुप रहना चाहिए जब उसे चारों तरफ से निशाना बनाया जा रहा हो? उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका सीधे अपने क्षेत्र से ईरान पर हमला नहीं कर सकता, इसलिए उसने ईरान के आसपास अपने सैन्य ठिकाने बना रखे हैं। "जब कोई हमारे घर के पास से हम पर हमला करेगा, तो हमारा जवाब भी वहीं दिया जाएगा। हम हमलावर देश नहीं हैं, लेकिन अपनी जनता और मातृभूमि की रक्षा करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।"
रक्षा और विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. जियाएनिया का यह बयान ईरान की कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक रणनीति का अहम हिस्सा है। इसके जरिये ईरान यह संदेश देना चाहता है कि बाहरी दबाव और सैन्य हमलों के बावजूद उसका आंतरिक ढांचा बेहद मजबूत है और वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 7 अप्रेल से जो अस्थाई सीजफायर (संघर्ष विराम) लागू है, उस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि ईरान द्वारा बताई गई 10 शर्तों पर अमेरिका क्या रुख अपनाता है और क्या यह सीजफायर किसी स्थायी शांति समझौते में बदल पाएगा या नहीं।
इस पूरे संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में आने वाले समय में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर भारत सहित दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। ( इनपुट : ANI)
Updated on:
28 Apr 2026 09:41 pm
Published on:
28 Apr 2026 09:38 pm
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