
ईरान में इजराइल काफी समय से सरकार गिराने की कोशिश में जुटा था। अब योजना फेल होने के बाद इजराइल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' में ताजा एक्शन से हड़कंप मच गया है।
एजेंसी के डायरेक्टर रोमन गोफमैन ने दो बड़े अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया है। ये दोनों अधिकारी ईरान की मौजूदा सरकार को गिराने की एक खास योजना बनाने में शामिल थे, जो पूरी तरह फेल हो गई।
इजराइली टीवी चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला मोसाद के अंदर बड़े बदलाव का हिस्सा है। दोनों अधिकारी एक-दूसरे से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। एक अफसर दिसंबर से मोसाद के इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट के हेड थे तो दूसरे ईरान डिवीजन को लीड कर रहे थे।
सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि शुरू से ही इन दोनों की गोफमैन से अनबन चल रही थी। फिर भी दोनों की छुट्टी आपसी सहमति से हुई है। हालांकि, दोनों एजेंसी में ही किसी और पद पर काम करते रहेंगे।
इस योजना में ईरान के अंदर अल्पसंख्यक समुदायों खासकर कुर्दों को समर्थन देना और लोगों को बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन के लिए उकसाना शामिल था। मकसद था कि ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक सरकार कमजोर हो जाए।
योजना में ईरान-इराक बॉर्डर के पास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर इजराइली हमले की भी बात थी। खासकर ईरानी कुर्दिस्तान इलाके में। उम्मीद थी कि इससे कुर्द लड़ाके ईरान में घुसकर आगे बढ़ेंगे और हजारों युवा उनके साथ जुड़ जाएंगे। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे देश में फैलकर तेहरान तक पहुंच जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, योजना में पूर्व ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को दोबारा सत्ता में लाने की भी बात थी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इजराइल कई सालों से अहमदीनेजाद से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा था।
कथित तौर पर हंगरी में एक अकादमिक सम्मेलन के दौरान तब के मोसाद चीफ डेविड बर्निया से उनकी मुलाकात भी हुई थी। यह योजना इतनी गंभीर थी कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए राजी करने के दौरान इसका जिक्र किया था।
हालिया संघर्ष में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के सुरक्षा ढांचे, मिसाइल सिस्टम और बसीज ठिकानों पर कई हमले भी किए। लेकिन तुर्की के दबाव और खुद कुर्द समूहों की चिंताओं की वजह से अमेरिका ने इस योजना से किनारा कर लिया।