
Iran Oman Meeting 2026: पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के बाद होर्मुज जलमार्ग को लेकर ईरान और ओमान के बीच पहली उच्चस्तरीय बैठक हुई है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोमवार को जानकारी दी कि मस्कट की यात्रा के दौरान दोनों देशों की संयुक्त होर्मुज समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जलमार्ग से जुड़े मौजूदा हालात की समीक्षा की गई और इसके भविष्य के प्रबंधन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के बाद तनाव कम करने के लिए तकनीकी स्तर की बातचीत आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच हुए सैन्य हमलों ने सीजफायर समझौते की नाजुक स्थिति को भी उजागर किया है।
होर्मुज जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। संघर्ष शुरू होने से पहले वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। इस जलमार्ग की सीमाएं ईरान और ओमान से लगती हैं इसलिए इसका संचालन और सुरक्षा दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं।
संघर्ष के दौरान ईरान ने अपने विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था। यही मुद्दा अब अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत का भी एक अहम हिस्सा बना हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष फिलहाल तनाव कम करने पर सहमत हुए हैं और होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी। हालांकि, ईरान की तरफ से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत जल्द फिर शुरू हो सकती है हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बैठक से एक दिन पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी थी कि यदि जहाज ईरान की निगरानी वाले निर्धारित मार्ग को छोड़कर किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत गुजरने की कोशिश करेंगे तो इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है तथा होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह सामान्य करने में देरी होगी।
ईरान का कहना है कि जलमार्ग के भविष्य के संचालन को लेकर ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ बातचीत जारी रहेगी और सभी फैसले अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में लिए जाएंगे।
हाल के दिनों में होर्मुज जलमार्ग के आसपास कई सैन्य घटनाएं सामने आई हैं। अमेरिका ने ईरान पर कमर्शियल जहाजों के खिलाफ आक्रामक गतिविधियों का आरोप लगाते हुए उसके कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करने का दावा किया। इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी लगातार इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।