
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। (फाइल फोटो- IANS)
यूक्रेन के बाद रूस अब नाटो देशों के साथ लड़ाई लड़ने की तैयारी में है। इसकी भनक लगते ही यूरोप भी अलर्ट हो गया है। अपनी सेना को उसने अपडेट करना शुरू कर दिया है।
रूस के बढ़ते खतरे के साए में यूरोपीय देश अब अपनी पुरानी युद्ध शैली को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर रहे हैं। नाटो के वरिष्ठ कमांडरों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते हथियारों और रणनीति में बड़े बदलाव नहीं किए गए तो रूस अगले तीन सालों में नाटो देशों पर हमला बोल सकता है।
यूरोप में अब महंगे जेट और टैंकों पर निर्भर रहने की बजाय अब सस्ते ड्रोन, इंटरसेप्टर और बड़े पैमाने पर उत्पादन वाले हथियारों पर जोर दिया जा रहा है। नाटो के यूरोप में डिप्टी सुप्रीम कमांडर एयर चीफ मार्शल सर जॉनी स्ट्रिंगर ने कहा कि खतरा अब हर तरफ से है।
उन्होंने बताया कि रूस की लंबी दूरी की मिसाइलें, उत्तर की तरफ से आने वाले हवाई हमले और समुद्री ताकत को देखते हुए यूरोप को अपनी रक्षा व्यवस्था को हजारों किलोमीटर दूर तक मजबूत करना होगा। उन्होंने साफ कहा कि अब सिर्फ महंगे हथियारों पर भरोसा नहीं चल सकता, क्योंकि ये बनाने में सालों लग जाते हैं।
उधर, जर्मन आर्मी के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल क्रिश्चियन फ्रॉयडिंग ने कहा कि जमीन पर लड़ाई की पूरी तस्वीर बदल गई है। यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के संघर्ष से सबक लेते हुए जर्मनी अब फौरन उपलब्ध हथियार खरीद रहा है। उन्होंने कहा कि पांच-दस साल इंतजार करने की बजाय जो आज मिल रहा है, वही ले रहे हैं ताकि कमजोरियां तुरंत भरी जा सकें।
इसके अलावा, ब्रिटिश आर्मी के चीफ जनरल सर रोली वॉकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत बताते हुए कहा कि पहले कोर प्लानिंग में 72 घंटे लगते थे, अब एक घंटे में हो जाती है। पहले एक दिन में 24 टारगेट्स पर हमला होता था, अब दस गुना ज्यादा। यानी युद्ध अब तेज, सस्ता और स्मार्ट होने वाला है।
उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा पर बहुत कम खर्च करते हैं और अमेरिका पर आश्रित रहते हैं। हाल ही में अमेरिका ने जर्मनी से 5000 सैनिक वापस बुलाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने नाटो से बाहर निकलने की भी धमकी दी है।
जुलाई में अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में यह मुद्दा गरमाने वाला है। यूरोपीय अधिकारी मान रहे हैं कि यूक्रेन युद्ध ने साफ कर दिया है कि पुरानी सोच से अब काम नहीं चलेगा। एयर डिफेंस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वारफेयर और गहरे सटीक हमलों की क्षमता बढ़ानी होगी।
Updated on:
29 Jun 2026 06:54 pm
Published on:
29 Jun 2026 06:51 pm
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