ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच खबर सामने आई है कि ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई अपने बेटे मुजतबा और अपने 20 करीबियों के साथ देश छोड़कर रूस भागने की योजना बना रहे है। हालांकि भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने इस खबर का खंडन किया है।
ईरान पर इन दिनों राजनीतिक संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पिछले कई दिनों से देश की जनता सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। इस प्रदर्शन को विदेशी ताकतों का समर्थन मिलने की बात भी कही जा रही है, जिसके चलते देश की सरकार गिर सकती है। अमेरिका तो खुले तौर पर यह कह चुका है कि वह इसमें दखल दे सकता है। इसी बीच अब बड़ी खबर सामने आ रही है कि ईरानी सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश छोड़कर भागने की तैयारी कर ली है।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि अगर खामेनेई सरकार इस आंदोलन पर काबू पाने में असफल रहती है और इसके चलते सरकार गिर जाती है तो खामेनेई अपने कुछ करीबियों के एक छोटे दल के साथ रूस भाग जाएंगे। इस दल में 86 वर्षीय खामेनेई और उनके बेटे मुजतबा समेत उनके 20 करीबी शामिल हैं। सुरक्षा बल और सेना जब सरकार के आदेश मानने से मना कर देंगे, उस परिस्थिति में खामेनेई यह कदम उठाएंगे। इस खबर के सामने आने के बाद से ईरान में भारी हलचल मच गई है।
हालांकि भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने इस खबर को झूठा बताया है। दूतावास ने कहा, इजरायल के साथ चले 12 दिनों के युद्ध के दौरान भी खामेनेई ने देश नहीं छोड़ा था और न ही वे अब ऐसी कोई योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, यह दुश्मन देशों द्वारा फैलाया गया झूठ है और वह इसकी कड़ी निंदा करते हैं। बता दें कि पिछले कई दिनों से ईरान में खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है। खबरों के अनुसार, खामेनेई ने चैरिटेबल फाउंडेशनों के नाम पर विदेशों में कई अरबों डॉलर की संपत्ति जमा की हुई हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले आठ दिनों में 78 शहरों की 222 से ज्यादा जगहों पर प्रदर्शन हो चुके हैं। इन आंदोलनों में अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे। इस दौरान 44 नाबालिगों को भी सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया है। ईरान की जनता देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट के
खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि देश में आर्थिक सुधार किए जाएं। हालांकि भारी विरोध प्रदर्शन के बीच खामेनेई के समर्थन में भी लोग सड़कों पर उतर गए हैं। किरमान जैसे शहरों में लोग खामेनेई के पक्ष में नारे लगा रहे हैं और सरकार का समर्थन कर रहे हैं।