
ईरान में सड़कों पर उतरे लोग (Photo-X)
Iran Crisis: भारत (India) के पड़ोस में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची है। नेपाल (Nepal) के बाद बांग्लादेश में प्रदर्शनकारियों ने सरकार को गिराया। अब ईरान में भी कमोबेश हालात कुछ वैसे ही बन रहे हैं। पिछले 6 दिनों से ईरान में भारी बवाल मचा हुआ है। प्रदर्शनकारी इस्लामिक रीजिम के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। यह प्रदर्शन अब धीरे-धीरे देश भर में फैलता जा रहा है। तेहरान, मशहद, क़ोम, इस्फहान और खुज़ेस्तान में खामनेई की सत्ता को प्रदर्शनकारी सीधी चुनौती दे रहे हैं। कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों ने भीड़ को तीतर बितर करने की कोशिश भी की है।
दरअसल, ईरान में पुलिस की गोलियों से मारे गए प्रदर्शनकारियों को जब दफनाया जा रहा था। तब भीड़ उग्र हो गई। अंतिम संस्कार के बाद लोगों ने खुलेआम “खामेनेई मुर्दाबाद” और “पहलवी वापस आएगा” जैसे नारे लगाए। यही नहीं, मशहद जोकि शिया धर्मगुरुओं की प्रमुख नगरी है। वहां भी सत्ता विरोधी और राजशाही समर्थक नारे बुलंद हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोगों की जेब और फ्रिज दोनों खाली हैं। हर दिन वे खुद को अधिक गरीब होते देख रहे हैं। बढ़ती महंगाई, खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें और रोजगार की कमी ने आम जनता की सहनशक्ति समाप्त कर दी है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने ईरानी की हिंसक कार्रवाई पर चिंता जताई है। शांतिपूर्ण विरोध को सम्मान करने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी खामनेई को चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को निशाना न बनाएं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को ईरान के विदेश मंत्री ने खतरनाक और उकसाने वाला बताया है। ईरान के पहलवी वंश के नेता रजा पहलवी ने ट्रंप के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है। जिससे इस प्रदर्शन को आने वाले दिनों में रीजिम में परिवर्तन की तौर पर देखा जा रहा है।
Published on:
03 Jan 2026 08:31 am
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