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अमेरिका से बातचीत को तैयार हुआ ईरान, पाक को झटका देकर ट्रंप के सामने रख दी नई शर्त, जानें अब कहां होगी फाइनल डील?

ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए सहमति जताई है, लेकिन शर्त रखी है कि हॉर्मुज स्ट्रेट से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाए। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका संघर्ष विराम उल्लंघन बंद करेगा।

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Apr 22, 2026
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (Photo-X)

ईरान अब अमेरिका से बातचीत करने के लिए तैयार हो गया है। लेकिन उसने अमेरिका के सामने एक सीधी शर्त रख दी है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा है कि तेहरान बातचीत के लिए तभी तैयार होगा जब अमेरिका हॉर्मुज स्ट्रेट से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म कर देगा।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इरावानी द्वारा 'रुडला न्यूज नेटवर्क' को दिए गए एक इंटरव्यू का हवाला देते हुए तसनीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि ईरानी दूत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका को सबसे पहले अपने 'संघर्ष विराम उल्लंघनों' को रोकना होगा।

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ईरानी राजदूत ने क्या कहा?

इरावानी ने कहा- अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी, यह संघर्ष विराम का उल्लंघन है। और हमने उनसे कहा है कि उन्हें यह नाकाबंदी हटा देनी चाहिए। हमें कुछ संकेत मिले हैं कि अमेरिका इसे हटाने के लिए तैयार है। और जैसे ही वे यह नाकाबंदी हटाएंगे, मुझे लगता है कि बातचीत का अगला दौर इस्तांबुल में होगा।

पाकिस्तान को बड़ा झटका

ईरानी दूत के नए बयान से पाकिस्तान को भी बड़ा झटका लगा है। अब तक यह माना जा रहा था कि दूसरे दौर की बातचीत इस्लामाबाद में होगी, पाकिस्तान इसकी पूरी तैयार कर रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर ईरान ने उसकी प्लानिंग पर पानी फेर दिया है।

इरावानी ने यह भी कहा- हमने सैन्य आक्रामकता शुरू नहीं की है। अमेरिका ने हमारे खिलाफ युद्ध शुरू किया था और हम तैयार हैं। अगर वे मेज पर बैठकर चर्चा करना चाहते हैं और कोई राजनीतिक हल निकालना चाहते हैं, तो वे हमें तैयार पाएंगे। अगर वे युद्ध करना चाहते हैं, तो इस मामले में भी ईरान उसके लिए तैयार है।

नाकाबंदी वार्ता में बड़ा रोड़ा

राजदूत की टिप्पणियों से पता चलता है कि भले ही बातचीत का कोई जरिया मौजूद हो, लेकिन नाकाबंदी हटाना ही औपचारिक कूटनीतिक प्रक्रिया में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है।

इस शर्त पर जोर देना दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास को दिखाता है, क्योंकि वे एक नाजुक संघर्ष विराम विस्तार के दौर से गुजर रहे हैं।

इस तनाव को तब और ज्यादा बल मिला जब बुधवार देर रात अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की कि वे मौजूदा संघर्ष विराम को और आगे बढ़ाएंगे, ताकि आगे की कूटनीति के लिए एक मौका मिल सके।

क्या अमेरिका के सामने झुकना ईरान की मजबूरी?

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि तेहरान, सार्वजनिक तौर पर लगातार टकराव का दिखावा करने के बावजूद, बढ़ते आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए निजी तौर पर लॉबिंग कर रहा है।

ट्रंप ने कहा है कि ईरान का होर्मुज स्ट्रेट को लेकर विरोध सिर्फ दिखावा है। उनके मुताबिक ईरान नहीं चाहता कि यह रास्ता बंद हो, क्योंकि इससे उसकी रोजाना करीब 500 मिलियन डॉलर की कमाई होती है और बंद होने पर उसे भारी नुकसान होगा।

लगातार बढ़ रहा तनाव

दूसरी ओर, इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि ओमान के पास एक कंटेनर जहाज पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गनबोट ने गोलीबारी की, जिससे जहाज के ब्रिज को नुकसान हुआ। हालांकि इस हमले में किसी की जान नहीं गई और न ही आग लगी या पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।

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