Israel Strike:मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। एक तरफ ईरान की मुद्रा 'रियाल' ऐतिहासिक गिरावट का सामना कर रही है, तो दूसरी तरफ लेबनान पर इजरायली हमलों में महिलाओं, सैनिकों और स्वास्थ्यकर्मियों की जान जा चुकी है।
Lebanon Attack :मध्य पूर्व इस वक्त दोहरे संकट से गुजर रहा है। एक ओर युद्ध के मैदान में बारूद बरस रहा है, तो दूसरी ओर आर्थिक मोर्चे पर देश कंगाल हो रहे हैं। हालिया लेबनान हमले ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। इजरायली सेना की ओर से लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में किए गए ताबड़तोड़ हवाई हमलों में भारी तबाही मची है। इन हमलों में न केवल सैन्य ठिकाने तबाह हुए हैं, बल्कि आम नागरिक और जीवन रक्षक दल भी इसकी चपेट में आ गए हैं। दूसरी तरफ, युद्ध की इस विभीषिका और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है और उसकी राष्ट्रीय मुद्रा 'रियाल' अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
दक्षिणी लेबनान में हालात बेहद दर्दनाक हैं। इजरायल के हालिया हवाई हमलों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में लेबनान के सैनिकों के साथ-साथ उन मेडिकल स्टाफ (स्वास्थ्यकर्मियों) की भी मौत हुई है, जो घायलों की मदद करने के लिए वहां मौजूद थे। युद्ध के नियमों के अनुसार मेडिकल टीमों पर हमला वर्जित है, लेकिन इस गोलाबारी में किसी को बख्शा नहीं गया।
इस त्रासदी में सबसे दुखद पहलू आम नागरिकों का मारा जाना है। दक्षिणी लेबनान के एक रिहायशी इलाके में हुए इजरायली अटैक में तीन महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग मलबे के बीच अपनों को तलाश रहे हैं और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। यह हमला बताता है कि सीमा पर चल रहा यह संघर्ष अब सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर निर्दोष परिवारों को अपना शिकार बना रहा है।
जहां एक तरफ लेबनान बमों की बारिश झेल रहा है, वहीं ईरान एक गहरे आर्थिक युद्ध में फंसा है। इजरायल-हमास और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे इस वृहद संघर्ष में ईरान की परोक्ष भूमिका के चलते उस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध और कड़े हो गए हैं। इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी 'रियाल' की कीमत रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गई है। महंगाई आसमान छू रही है और आम ईरानी नागरिक रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और विदेशी निवेशक देश से दूरी बना रहे हैं।
इस पूरे परिदृश्य ने तीसरे विश्व युद्ध जैसी आशंकाओं को हवा दे दी है। एक तरफ हिजबुल्लाह इन हमलों का बदला लेने की कसम खा रहा है, तो दूसरी तरफ इजरायल अपनी सुरक्षा के नाम पर किसी भी हद तक जाने को तैयार है। ईरान, जो पहले से ही आर्थिक तौर पर टूट रहा है, अगर इस युद्ध में सीधे तौर पर कूदता है, तो इसके परिणाम पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था (खासकर कच्चे तेल की कीमतों) के लिए विनाशकारी होंगे।
इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने मेडिकल स्टाफ और आम महिलाओं की मौत पर गहरी चिंता जताते हुए इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा है। लेबनान सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है, जबकि इजरायली रक्षा बलों (IDF) का तर्क है कि वे केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।
आने वाले दिनों में लेबनान की सीमा पर तनाव और बढ़ने की आशंका है। हिजबुल्लाह की तरफ से इजरायल के उत्तरी शहरों पर रॉकेट दागे जा सकते हैं। दूसरी ओर, दुनिया की नजरें ईरान पर भी टिकी हैं कि वह अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाता है या प्रॉक्सी वॉर को और तेज करता है।
बहरहाल, इस युद्ध का एक बड़ा पहलू 'इकोनॉमिक वॉरफेयर' (आर्थिक युद्ध) है। बम और मिसाइलें सिर्फ इमारतें नहीं गिरा रहीं, बल्कि देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दशकों पीछे धकेल रही हैं। ईरान की करेंसी का गिरना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। युद्ध के कारण मध्य पूर्व में व्यापार और सप्लाई चेन पूरी तरह से ठप पड़ने के कगार पर है।