Iran evacuation: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों को जल्द स्वदेश लौटने की सलाह दी है। आइए जानते हैं कि ईरान में कितने भारतीय रहते हैं और उनके पास भारत वापस आने के लिए हवाई व समुद्री रास्ते कौन-कौन से हैं।
Indian Embassy advisory : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव (Iran US tension) से पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस गंभीर होते माहौल के बीच भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए बड़े कदम उठाए हैं। वहीं तेहरान स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy advisory) ने एक ताजा चेतावनी जारी करते हुए वहां रह रहे सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है। दूतावास के इस बयान के बाद ईरान में रह रहे छात्रों, प्रोफेशनल्स और उनके परिवारों को फ़िक्र हो गई हैं। हर कोई जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लौटने (return flights to India)के तरीके तलाश रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों और विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में ईरान में लगभग 9,000 से 10,000 भारतीय नागरिक निवास कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की है, जो वहां के विश्वविद्यालयों में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा, हजारों भारतीय नागरिक तीर्थयात्रा, व्यापार और वहां के बंदरगाहों पर काम करने के लिए भी रहते हैं। युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए इन सभी की सुरक्षा भारत सरकार के लिए चुनौती है।
ईरान से भारत लौटने के लिए नागरिकों के पास वर्तमान में कई विकल्प मौजूद हैं:
सीधे हवाई जहाज (Direct Flights): हालात सामान्य रहने तक तेहरान से दिल्ली और मुंबई के लिए सीधी उड़ानें संचालित होती हैं। नागरिक एयरलाइन वेबसाइट्स पर जाकर सीधे इन कमर्शियल फ्लाइट्स की टिकट बुक कर सकते हैं।
वाया हवाई जहाज (Connecting Flights): अगर दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें रद्द होती हैं, तो यात्री मिडिल ईस्ट के अन्य रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। वे दुबई (UAE), मस्कट (ओमान), या दोहा (कतर) के रास्ते 'वाया फ्लाइट्स' लेकर भारत पहुंच सकते हैं।
तेहरान (ईरान) से दिल्ली के लिए सीधी उड़ान (Direct Flight) : मुख्य रूप से महान एयर (Mahan Air) द्वारा संचालित की जाती है, जो हफ्ते में आमतौर पर मंगलवार और शुक्रवार को चलती है।
अगली सीधी उड़ान (महान एयर - W571): कल, मंगलवार (24 फरवरी) को तेहरान के इमाम खुमैनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IKA) से शाम लगभग 6:35 बजे (स्थानीय समयानुसार) उड़ान भरेगी।
दिल्ली पहुंचने का समय: यह फ्लाइट भारत के समयानुसार रात लगभग 12:15 बजे (यानि बुधवार, 25 फरवरी की शुरुआत में) दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DEL) पर लैंड करेगी।
आज कोई सीधी उड़ान नहीं है, लेकिन आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स (वाया दुबई, मस्कट या दोहा) का विकल्प चुन सकते हैं। फ्लाईदुबई (flydubai), एमिरेट्स (Emirates), और एयर अरेबिया (Air Arabia) जैसी एयरलाइंस रोजाना कनेक्टिंग उड़ानें संचालित करती हैं, जिन्हें लेकर आप आज भी रवाना हो सकते हैं, हालांकि इनमें समय थोड़ा ज्यादा (8 से 15 घंटे) लगते हैं।
फ्लाईदुबई (flydubai)
रवानगी (तेहरान - IKA): शाम 7:25 बजे (19:25)
लेओवर: दुबई (DXB)
आगमन (दिल्ली - DEL): मंगलवार सुबह 9:55 बजे
कुल समय: लगभग 12 घंटे 30 मिनट
कतर एयरवेज (Qatar Airways)
रवानगी (तेहरान - IKA): रात 10:45 बजे (22:45)
लेओवर: दोहा (DOH)
आगमन (दिल्ली - DEL): मंगलवार सुबह 8:15 बजे
कुल समय: लगभग 7 घंटे 30 मिनट (यह सबसे तेज़ कनेक्टिंग विकल्पों में से एक है)
कुवैत एयरवेज (Kuwait Airways)
रवानगी (तेहरान - IKA): दोपहर 3:30 बजे (15:30 : नोट- इसका समय बहुत करीब है, इसके लिए आपको तुरंत एयरपोर्ट पर होना चाहिए)
लेओवर: कुवैत (KWI)
आगमन (दिल्ली - DEL): मंगलवार रात 12:35 बजे (00:35)
नोट: तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए उड़ानों के शिड्यूल में अचानक बदलाव हो सकता है। टिकट बुक करने के लिए आप तुरंत संबंधित एयरलाइंस (flydubai.com, qatarairways.com) की आधिकारिक वेबसाइट या किसी प्रमुख ट्रैवल पोर्टल पर जाकर लाइव उपलब्धता और कीमतें चेक कर सकते हैं।
जलयान (Sea Routes/Ships): यदि किसी कारणवश हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया जाता है, तो समुद्री मार्ग एक बहुत बड़ा और सुरक्षित विकल्प साबित होगा। ईरान के बंदर अब्बास (Bandar Abbas) या चाबहार पोर्ट से व्यावसायिक जहाजों या भविष्य में भारत सरकार के माध्यम से भेजे जाने वाले नौसेना के रेस्क्यू जलयानों के जरिए सुरक्षित वापसी की जा सकती है।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। दूतावास ने साफ तौर कहा है कि सभी भारतीय नागरिक व्यावसायिक उड़ानों या ट्रांसपोर्ट के जो भी साधन इस वक्त मौजूद हैं, उनका इस्तेमाल करके फौरन ईरान छोड़ दें। दूतावास ने एक आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। अधिकारियों ने हिदायत दी है कि जो भारतीय अभी वहां फंसे हुए हैं, वे खुद को दूतावास की वेबसाइट पर रजिस्टर करें, अपना पासपोर्ट हमेशा साथ रखें और किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन या भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें।
दूतावास की इस एडवाइजरी के बाद भारत में रहने वाले परिजनों की धड़कनें तेज हो गई हैं। ईरान में पढ़ रहे कश्मीरी और दक्षिण भारतीय छात्रों के परिजनों ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार से अपील की है। उनका कहना है कि कमर्शियल फ्लाइट्स के टिकट बहुत महंगे हो गए हैं, इसलिए सरकार को छात्रों की मुफ्त और सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत विशेष विमान भेजने चाहिए।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। सूत्रों के मुताबिक, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय वायुसेना को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है। अगर ईरान का एयरस्पेस बंद होता है, तो सरकार 'ऑपरेशन गंगा' या 'ऑपरेशन अजय' की तर्ज पर ईरान से भी एक बड़ा एयरलिफ्ट या समुद्री रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर सकती है।
इस पूरे तनाव का एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक पहलू भी है। ईरान में भारत का महत्वाकांक्षी 'चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट' चल रहा है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ता है, तो वहां काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों की सुरक्षा के साथ-साथ करोड़ों डॉलर के इस प्रोजेक्ट और मध्य एशिया के साथ भारत के व्यापारिक मार्गों पर भी भारी संकट खड़ा हो सकता है।