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Iran-US Tension: युद्ध की लागत को लेकर झूठ बोल रहा अमेरिका, ईरान का बड़ा आरोप

Iran-US Talks: ईरान के विदेश मंत्री अराघची का दावा है- अमेरिका युद्ध में 100 अरब डॉलर खर्च कर चुका, पेंटागन खर्च को लेकर झूठ बोल रहा है।

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May 01, 2026
फोटो में अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई (सोर्स: ANI)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की पेंटागन पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका युद्ध की असली कीमत छुपा रहा है।

28 फरवरी को ट्रंप प्रशासन और नेतन्याहू के साथ शुरू हुए इस युद्ध ने अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पेंटागन झूठ बोल रहा है।

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अमेरिका पर 100 अरब डॉलर का सीधा खर्च

ईरानी विदेश मंत्री का दावा है कि नेतन्याहू की इस जुआ खेलने वाली नीति ने अमेरिका का अब तक सीधे 100 अरब डॉलर का खर्च करा दिया है।

यह आंकड़ा अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा बताए गए आंकड़े से चार गुना ज्यादा है। अराघची ने कहा कि पेंटागन केवल 25 अरब डॉलर का आंकड़ा बता रहा है, लेकिन हकीकत इससे कहीं बड़ी है।

उन्होंने अमेरिकी कर्ज और आर्थिक नुकसान से जुड़े चार्ट भी शेयर किए। इनमें साफ दिख रहा है कि युद्ध की वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर कितना बोझ पड़ रहा है।

आम अमेरिकी परिवारों पर 500 डॉलर का मासिक बोझ

अराघची ने आगे कहा कि युद्ध का असली खर्च तो अप्रत्यक्ष रूप से और भी ज्यादा है। अमेरिकी टैक्सपेयर्स यानी आम नागरिकों पर इसका बोझ बहुत भारी है। हर अमेरिकी परिवार को हर महीने 500 डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है और यह रकम तेजी से बढ़ रही है।

उनका कहना है कि 'इजराइल फर्स्ट' की नीति हमेशा 'अमेरिका लास्ट' का मतलब रखती है। यानी इजराइल को प्राथमिकता देने से अमेरिका का नुकसान हो रहा है।

युद्ध की पृष्ठभूमि

यह विवाद उस युद्ध को लेकर है जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त अभियान से शुरू हुआ। ईरान इस कार्रवाई को गलत बताता रहा है। अब युद्ध के कुछ महीनों बाद ईरान अमेरिका पर खर्च छुपाने का आरोप लगा रहा है।

अराघची का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों तरफ से तनाव अभी भी बना हुआ है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमले किए गए थे, जिसके बाद क्षेत्र में तेल की कीमतें भी प्रभावित हुईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मानते हैं कि युद्ध के खर्च को लेकर दोनों तरफ से अलग-अलग आंकड़े आते रहते हैं। अमेरिका आमतौर पर आधिकारिक रूप से कम खर्च बताता है, जबकि विरोधी देश इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं।

ईरान की यह टिप्पणी अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी सवाल उठाती है। ट्रंप सरकार पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि आम अमेरिकी नागरिक युद्ध के आर्थिक बोझ से परेशान हैं। महंगाई, कर्ज और टैक्स जैसे मुद्दे वहां पहले से ही चर्चा में हैं।

अमेरिका ने दावे पर नहीं दिया जवाब

अभी तक अमेरिकी पेंटागन ने ईरान के इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन अगर यह विवाद बढ़ा तो दोनों देशों के बीच नई बहस छिड़ सकती है।

ईरान लगातार कह रहा है कि यह युद्ध इजराइल की वजह से थोपा गया है और अमेरिका इसके लिए अनावश्यक रूप से पैसे खर्च कर रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिका और इजराइल ईरान को क्षेत्रीय खतरा मानते हैं।यह पूरा मामला दिखाता है कि युद्ध न सिर्फ जान-माल का नुकसान करता है बल्कि देशों की अर्थव्यवस्था को भी लंबे समय तक प्रभावित रखता है। आम लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है।

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