
हॉर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षाकर्मी।(File Photo - IANS)
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद दुनिया के सबसे अहम जलमार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक 90 प्रतिशत से ज्यादा घट गया है। पहले यहां रोजाना करीब 130 बड़े जहाज आते-जाते थे, लेकिन अब यह संख्या मुश्किल से 10 तक पहुंच गई है। इससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और व्यापार पर बड़ा असर पड़ रहा है।
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के मुताबिक, फारस की खाड़ी के अंदर 850 से 870 बड़े मर्चेंट जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर करीब 20 हजार नाविक सवार हैं।
बताया जा रहा है कि क्रू चेंज नहीं हो पा रहा, वहीं खाने-पीने की चीजें भी खत्म होने लगी हैं और लंबे समय तक फंसने से नाविकों का मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है।
यूकेएमटीओ के हेड ऑफ ऑपरेशंस कमांडर जो ब्लैक ने कहा- हमारी सबसे बड़ी चिंता नाविकों की सुरक्षा है। वे कहीं जा नहीं रहे हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे तो स्थिति और खराब हो जाएगी।
मार्च की शुरुआत से 27 अप्रैल तक इस इलाके में 40 से ज्यादा घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। इनमें जहाजों पर सीधे हमले, ड्रोन से शरापनेल लगना, उत्पीड़न और जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर करना शामिल है।
26 मामलों में मर्चेंट जहाजों पर सीधा हमला हुआ। इससे पहले फरवरी 28 को अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। उसके बाद से ही इस इलाके में तनाव चरम पर है।
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। पहले यहां रोजाना 130 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब ट्रैफिक लगभग ठप हो गया है। इससे ग्लोबल ट्रेड रूट्स प्रभावित हो रहे हैं और कई देशों में तेल-गैस की कीमतें बढ़ने का खतरा है।
यूकेएमटीओ ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक चली तो सोमालिया के पास फिर से समुद्री लुटेरों (पाइरेसी) की समस्या बढ़ सकती है। पहले भी जब रेड सी में समस्या हुई थी, तब पाइरेसी बढ़ी थी।
यूकेएमटीओ रॉयल नेवी की देखरेख में काम करता है। यह 9/11 के बाद शुरू किया गया था। अब यह रेड सी, गल्फ और उत्तरी हिंद महासागर में जहाजों को रियल टाइम जानकारी और चेतावनी देता है। AIS ट्रैकिंग, जहाजों की रिपोर्ट और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस के जरिए यह काम करता है।
संगठन ने कहा कि नाविकों की सुरक्षा सबसे ऊपर है। वे लगातार सलाह जारी कर रहे हैं ताकि जहाज सुरक्षित रहें।आगे क्या हो सकता है? अभी हालात काफी अस्थिर हैं। अगर तनाव कम नहीं हुआ तो ग्लोबल सप्लाई चेन पर और गहरा असर पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा- कई कंपनियां अब दूसरे रास्ते तलाश रही हैं, लेकिन इससे लागत बढ़ रही है। भारत जैसे देशों को भी तेल-गैस की सप्लाई पर असर पड़ सकता है क्योंकि हम खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं।
Published on:
01 May 2026 04:24 pm
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