
अमेरिका में प्रवासी भारतीय छात्र । ( फाइल फोटो: पत्रिका)
Lawmakers: अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने और वहां अपना शानदार करियर बनाने का सपना देख रहे हजारों भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के 35 सांसदों ने हाल ही में एक नया विधायी बिल (प्रस्ताव) पेश किया है, जो सीधे तौर पर विदेशी छात्रों, विशेषकर भारतीयों के भविष्य पर भारी ग्रहण लगा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल कानूनी जामा पहन लेता है, तो यह भारतीय छात्रों की उम्मीदों और उनके करियर को पूरी तरह से पलट कर रख देगा। ध्यान रहे कि अगर हम अमेरिकी सरकार और 'ओपन डोर्स रिपोर्ट' के डेटा की बात करें, तो हर साल लगभग 2.5 लाख से 3.5 लाख से अधिक भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं।
इस नए बिल का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियों को सुरक्षित करना और इमिग्रेशन के नियमों को सख्त बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, इसका सबसे बड़ा और सीधा प्रहार 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' और एच-1बी वीजा की राह देख रहे विदेशी छात्रों पर पड़ेगा। वर्तमान नियमों के अनुसार, विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित की पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों को अपनी डिग्री पूरी करने के बाद अधिकतम तीन साल तक अमेरिका में रुक कर काम करने की अनुमति मिलती है। लेकिन, इस नए प्रस्ताव में छात्रों के काम करने की अवधि को सीमित करने और रोजगार की शर्तों को बेहद कड़ा करने की बात कही गई है।
भारत से हर साल लाखों की संख्या में युवा भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर और अपने परिवारों की जीवन भर की जमा-पूंजी लगा कर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं। उनका मुख्य लक्ष्य वहां गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के बाद कुछ सालों तक काम करके अपना कर्ज चुकाना और एक बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करना होता है। यदि यह नया बिल पास हो जाता है, तो इन छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करते ही तुरंत भारत वापस लौटना पड़ सकता है। इससे न केवल उनका 'अमेरिकन ड्रीम' चकनाचूर होगा, बल्कि वे एक गहरे आर्थिक संकट में भी फंस जाएंगे।
अमेरिकी टेक कंपनियों और बड़े विश्वविद्यालयों ने भी इस विधायी कदम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका स्पष्ट तर्क है कि भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका के तकनीकी विकास, नवाचार और रिसर्च में बहुत बड़ा योगदान देते हैं। ऐसे कठोर कदमों से अमेरिका खुद अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को नुकसान पहुंचा सकता है।
यह खबर बाहर आते ही शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और भारतीय प्रवासी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यह बिल अमेरिका की 'ग्लोबल टैलेंट हब' वाली छवि को बुरी तरह नुकसान पहुंचाएगा। छात्रों में डर और असमंजस का माहौल है। वे सोशल मीडिया के जरिए सरकार से अपील कर रहे हैं कि शिक्षा और प्रतिभा को राजनीति का शिकार न बनाया जाए।
अब पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिकी संसद के आगामी सत्र पर टिकी हुई हैं, जहां इस बिल पर विस्तार से चर्चा और बहस होनी है। भारतीय विदेश मंत्रालय और वॉशिंगटन में स्थित भारतीय दूतावास भी इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या टेक लॉबी और विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार पर इस बिल को वापस लेने या इसमें बड़े संशोधन करने का दबाव बना पाते हैं।
बहरहाल,इस पूरे मामले का एक दूसरा बड़ा पहलू यह भी है कि अमेरिका के इस सख्त कदम से कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को सीधा फायदा पहुंच सकता है। अगर अमेरिका में छात्रों के लिए नियम कड़े होते हैं, तो मेधावी भारतीय युवा अमेरिका के बजाय इन देशों का रुख करना शुरू कर देंगे। इससे दुनिया भर की बेहतरीन प्रतिभाओं का पलायन अमेरिका से दूर हो जाएगा, जो लंबी अवधि में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
Updated on:
01 May 2026 06:36 pm
Published on:
01 May 2026 06:35 pm
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