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ईरान को नहीं है पाक पर भरोसा, अब भारत पर टिकी सबकी निगाहें, युद्ध समझौते पर बड़ा अपडेट

Iran US War Update: ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और भारत को अपना भरोसेमंद दोस्त बताया है। ट्रंप के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ठुकराने के बाद क्या अब भारत बनेगा मध्यस्थ? पढ़ें पूरी खबर।

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Mar 30, 2026
Iran US War Update

Iran US War Update: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान की ओर से एक अहम कूटनीतिक संकेत सामने आया है। ईरानी सूत्रों ने अमेरिका के साथ संभावित बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है, जबकि भारत को एक भरोसेमंद देश बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान द्वारा भेजे गए 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की भूमिका अनिश्चित है और वह किसी भी संभावित समझौते का श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है।

ईरानी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक रुख तय नहीं किया गया है।

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भारत को बताया भरोसेमंद साथी

रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सरकारी सूत्रों ने भारत को एक भरोसेमंद और करीबी देश बताया है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि बातचीत आगे बढ़ती है, तो भारत इसमें शामिल हो सकता है।ईरान का मानना है कि भारत के साथ उसके लंबे समय से स्थिर और संतुलित संबंध रहे हैं, जो उसे मध्यस्थता के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

मुस्लिम देशों को साथ लाने में जुटा पाकिस्तान

इस बीच पाकिस्तान सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक कर खुद को शांति दूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान बातचीत के लिए इस्लामाबाद को संभावित स्थान के रूप में भी प्रस्तावित किया है और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।

पाकिस्तान पर भरोसा क्यों नहीं?

CNN-News18 के हवाले से कहा गया है कि ईरान को पाकिस्तान की निष्पक्षता पर संदेह है। इसकी एक वजह पाकिस्तान के अमेरिका के साथ करीबी संबंध भी माने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की भूमिका को लेकर स्पष्टता की कमी ही अविश्वास का मुख्य कारण है।

भारत-ईरान संबंध बने आधार

भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग लंबे समय से जारी है। चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट्स ने इन संबंधों को और मजबूत किया है, जिससे ईरान भारत पर भरोसा जता रहा है।

बदलते कूटनीतिक संकेत

यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि क्षेत्रीय कूटनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। पाकिस्तान की कोशिशों को जहां झटका लगा है, वहीं भारत की भूमिका को लेकर संभावनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं। फिलहाल, नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में यह कूटनीतिक पहल किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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