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क्यों इजराइल के दबाव में डोनाल्ड ट्रंप? युद्ध के बीच ईरान ने खोल दिया बड़ा राज

Iran US War Update: ईरान का दावा- डोनाल्ड ट्रंप मोसाद के दबाव में हैं। जमीनी हमले की स्थिति में अमेरिकी सैनिकों को कड़ी चेतावनी... युद्ध के बीच ईरान ने खोल दिया बड़ा राज।

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Mar 29, 2026
Iran US War Update

Iran US War Update: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अब तक का सबसे सनसनीखेज हमला बोला है। ईरान ने दावा किया है कि ट्रंप स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले रहे हैं, बल्कि वे इजरायल और उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद के हाथों की कठपुतली बन चुके हैं। ईरान ने इसके पीछे ट्रंप के अतीत से जुड़े एक विवादित केस का भी हवाला दिया है।

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एपस्टीन केस के दबाव में हैं ट्रंप?

ईरानी आर्म्ड फोर्सेज के प्रवक्ता ने एक वीडियो संदेश जारी कर सनसनीखेज दावा किया। प्रवक्ता ने कहा, ''इसमें कोई संदेह नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, कुख्यात एपस्टीन केस (Epstein Case) में अपने बैकग्राउंड के कारण मोसाद जैसे आतंकवादी संगठन के दबाव में हैं। इसी दबाव के चलते वे ईरान के खिलाफ युद्ध और आक्रामकता में जायोनी शासन (इजरायल) के प्रधानमंत्री के हाथों की कठपुतली बन गए हैं।''

बताया दुनिया के सबसे धोखेबाज राष्ट्रपति

ईरान ने ट्रंप की मानसिक स्थिरता पर भी सवाल उठाए हैं। प्रवक्ता ने ट्रंप को ''दुनिया का सबसे धोखेबाज राष्ट्रपति'' करार देते हुए कहा कि उनमें बौद्धिक या वैचारिक स्थिरता की कमी है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने अपनी सेना की कमान एक ऐसे व्यक्ति को सौंप दी है, जिसके खतरनाक और गलत फैसलों ने अमेरिकी सेना को मौत के दलदल में धकेल दिया है।

फारस की खाड़ी में जमीनी हमले पर ईरान की चेतावनी

ईरान ने ट्रंप द्वारा फारस की खाड़ी के द्वीपों पर कब्जे और जमीनी हमले की धमकियों को महज एक सपना बताया है। ईरानी प्रवक्ता ने बेहद तीखे लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, ''इस्लाम के योद्धा लंबे समय से ऐसी किसी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। हम यह साबित कर देंगे कि आक्रमण और कब्जे का नतीजा केवल अपमानजनक कैद और तबाही होगा। अमेरिकी कमांडर और सैनिक फारस की खाड़ी की 'शार्कों' (Sharks) के लिए अच्छा भोजन बनेंगे।''

ताकत की भाषा ही समझते हैं ट्रंप

ईरान का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप केवल ताकत की भाषा समझते हैं। प्रवक्ता के अनुसार, ट्रंप एक तरफ बातचीत का संदेश भेजते हैं और दूसरी तरफ गुपचुप हमले की योजना बनाते हैं, इसलिए उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

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