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जंग के बीच ड्रैगन को लगा 440 वोल्ट का झटका, ईरान ने हॉर्मुज में घेरे दो चीनी जहाज

Closure of the Strait of Hormuz: चीन के स्वामित्व वाले दो जहाज ईरान के दक्षिणी बंदरगाह बंदर अब्बास के पास लारक द्वीप के निकट पहुंचे थे, लेकिन IRGC की चेतावनी के बाद दोनों जहाजों को यू-टर्न लेना पड़ा।

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Mar 27, 2026
Iran-China Dispute

Iran-China Dispute: मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध के बीच ईरान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चीन के दो बड़े कंटेनर जहाजों को रोक दिया और उन्हें वापस मुड़ने पर मजबूर कर दिया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट बंद है और अमेरिका व इजरायल के सहयोगी देशों से जुड़े जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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ईरान ने बीच समंदर में रोके चीन के जहाज

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के स्वामित्व वाले दो जहाज CSCL Indian Ocean और CSCL Arctic Ocean ईरान के दक्षिणी बंदरगाह बंदर अब्बास के पास लारक द्वीप के निकट पहुंचे थे, लेकिन IRGC की चेतावनी के बाद दोनों जहाजों को यू-टर्न लेना पड़ा। ये जहाज चीनी राज्य-owned कंपनी COSCO द्वारा संचालित बताए जा रहे हैं। Nour News ने बताया कि IRGC ने अलग-अलग देशों के तीन कंटेनर जहाजों को भी वापस लौटा दिया है।

IRGC बोला- बंद है रास्ता

IRGC ने अपने बयान में कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है। अमेरिका और इजरायल के सहयोगियों से जुड़े किसी भी जहाज को गुजरने की इजाजत नहीं होगी।' ईरान पहले भी कह चुका है कि केवल इजरायल और अमेरिका के सहयोगी देशों के जहाजों को ही इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से रोका जाएगा। फिलहाल केवल उन्हीं जहाजों को अनुमति दी जा रही है जिन पर ईरान के लिए घरेलू सामान, कारें, कपड़े और दवाएं जैसी जरूरी चीजें लदी हों। कुछ अनाज वाले जहाजों को देरी के बाद एंट्री मिली है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। ईरान लंबे समय से धमकी दे रहा था कि अगर उसके खिलाफ कोई हमला हुआ तो वह इस जलमार्ग को बंद कर देगा। फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद से इस क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ईरान का दावा है कि वह दुश्मन देशों के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर रोक लगा रहा है।

पहले चीन और ईरान के संबंध थे मजबूत

चीन के साथ ईरान के संबंध काफी पुराने और मजबूत माने जाते हैं। ईरान अपना 90 प्रतिशत तेल चीन को निर्यात करता है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले चीन ईरान को हथियार भी बेचता रहा है, हालांकि सुरक्षा गारंटी देने से बचता रहा। फिर भी इस घटना से दोनों देशों के बीच रिश्तों पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि चीन के जहाज भी नहीं बचे।

इजरायल ने दी ईरान पर हमले तेज करने की चेतावनी

इजरायल के रक्षा मंत्री काट्ज ने ईरान पर और तेज हमलों की चेतावनी दी है। अमेरिका का पेंटागन मध्य पूर्व में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है, जिससे ईरान पर हमले के विकल्प बढ़ जाएंगे। ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा क्षेत्र पर हमला न करने के फैसले को तीन बार बढ़ाया है।

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