
Diplomatic-Tension: ओमान के तट के पास एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर अमेरिकी हमले के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है। इसके बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए नई दिल्ली में तैनात सबसे वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक जेसन मीक्स को तलब किया है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर अपनी तीव्र आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और लोगों ने ट्रंप को भला बुरा कहा है। एक बयान यह भी सामने आया है कि अगर नेता कमजोर हो तो सबसे मजबूत सेना होते हुए भी मजाक ही उड़ता है।
भारत हो या अमेरिका, सोशल मीडिया पर दोनों ही देशों के नागरिकों ने इस हमले को गलत बताया है। उन्होंने कहा सैन्य शक्ति देशों को आपसे डरा सकती है। यह उन्हें आपका सम्मान नहीं करा सकती। दुर्भाग्य से अमेरिका के राष्ट्रपति पूरी दुनिया के सामने एक मजाक बन कर रह गए हैं। जब शीर्ष पर बैठा नेतृत्व कमजोर, आवेशी और अगली सुर्खियों से आगे सोचने में असमर्थ हो, तो इस ग्रह पर सबसे शक्तिशाली सेना का होना भी पूरी तरह से बेकार है। अमेरिका ने खुद को और साथ ही दुनिया के एक बड़े हिस्से को जिस मुसीबत में झोंक दिया है, वह इस बात का सुबूत है।
लोगों ने कहा कि यह अमेरिका है जो ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में है, न कि बाकी दुनिया। हर संप्रभु देश को अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर जहां से वह चाहे वहां से तेल खरीदने का अधिकार है। हालांकि, हममें से कई लोगों को यह उम्मीद नहीं थी कि जब दादागिरी और दबाव बनाने की राजनीति विफल हो जाएगी, तो वाशिंगटन स्थिति को और तनावपूर्ण बनाना जारी रखेगा और एक ऐसे संघर्ष के बीच फंसे जहाजों और नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर देगा जो उनका है ही नहीं।
यूजर्स ने कहा है कि ट्रंप अमेरिका को बाकी दुनिया से अलग-थलग करने में कामयाब रहे हैं। यूरोप निराश है, कनाडा निराश है, और अब पश्चिम एशिया के देश और भारत जैसे साझेदार भी यह सवाल उठा रहे हैं कि यह सब किस दिशा में जा रहा है। उनके बाद जो भी सत्ता में आएगा, उसे उन रिश्तों को सुधारने और उस दादागिरी, धमकियों और राजनयिक लापरवाही के लिए माफी मांगने में सालों लग जाएंगे जो इस प्रशासन की पहचान बन चुके हैं।
इस गंभीर घटना ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों सहित नई दिल्ली में हड़कंप मच गया है। भारत सरकार ने इस मामले को बेहद संजीदगी से लेते हुए अमेरिका के सामने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए नई दिल्ली में तैनात शीर्ष अमेरिकी राजनयिक को तलब किया है और इस पूरी घटना पर जवाब मांगा है।
इस दर्दनाक हादसे पर भारत सरकार का रुख बेहद सख्त है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर इस घटना पर गहरा दुख जताया है और साफ किया है कि निर्दोष भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख या शीर्ष राजनयिक को विदेश मंत्रालय के मुख्यालय (साउथ ब्लॉक) बुलाया गया। भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष को एक सख्त विरोध पत्र सौंपा है, जिसमें इस हमले की निष्पक्ष व त्वरित जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि सैन्य शक्ति से देशों में भय उत्पन्न हो सकता है, लेकिन सम्मान नहीं। दुर्भाग्यवश, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पूरी दुनिया के सामने हंसी का पात्र बन गए हैं। दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना का होना तब कतई बेकार है जब शीर्ष नेतृत्व कमजोर, और अगली सनसनीखेज खबर से आगे सोचने में असमर्थ हो। अमेरिका ने न सिर्फ खुद को बल्कि दुनिया के एक बड़े हिस्से को जिस मुसीबत में घसीटा है, वह इसका प्रमाण है।
यूजर बिक्सबी ट्री के शब्दों में, दुनिया के बाकी देशों का भरोसा फिर से जीतने से पहले अमेरिका को अपने आंतरिक मामलों में काफी बदलाव करने होंगे। उन्होंने ट्रंप को दो बार सत्ता में पहुंचाया है। इसी तरह एक और यूजर ने कहा कि ट्रंन महज एक लक्षण हैं, एक ऐसी व्यवस्था का परिणाम हैं जो अंदर से पूरी तरह सड़ी-गली और भ्रष्ट है।
लोटाइम पायलट नामक यूजर ने कहा कि मैं अमेरिकी हूं। हम पर भरोसा मत करो। कभी भरोसा मत करो। जिन लोगों ने उसे वोट दिया था, वे बदले नहीं हैं। मैं न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में उनके साथ हर दिन काम करता हूँ। वहाँ दो ऐसे काउंटी हैं जहाँ रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा है। वे जो कुछ हो रहा है उससे खुश हैं और आपको अपना दुश्मन मानते हैं। जब मैं युद्ध, रूस समर्थक भावना या सहयोगियों के उत्पीड़न के बारे में शिकायत करता हूँ, तो वे मुझसे कहते हैं, "मैंने इसी के लिए वोट दिया था।" मुझे इससे सख्त नफरत है।
कैरिन्टो का कहना है कि इस समय, संबंध सुधारने व व्यापक सुधारों में दशकों का समय लगेगा। भले ही अगला उम्मीदवार समझदार हो, अब हर कोई यही मानता है कि अमेरिका एक और ट्रंप-शैली की आपदा से बस एक चुनाव दूर है।
यूजर धलीमन ने पोस्ट में कहाकि भारत लंबे समय से अमेरिका से नाराज है… टैरिफ, भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में ट्रंप के बयान, पिछले साल भारत-पाकिस्तान युद्ध के बारे में ट्रंप के बयान… अब भारत का धैर्य खत्म हो रहा है।
खामवोम ने पोस्ट में कहा कि भारतीय तेल टैंकर (एमटी सेट्टेबेलो) कथित तौर पर ईरान से तेल ले जाने का प्रयास कर रहा था। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी कर रखी है और एमटी सेट्टेबेलो को वापस लौटने के लिए कहा, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने जहाज को निष्क्रिय करने के लिए गोलीबारी की।
इधर भारत सरकार ने लापता भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर इस घटना की तीखी आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नागराज नायडू ने अमेरिकी राजनयिक को विदेश मंत्रालय बुलाकर एक मजबूत कूटनीतिक विरोध सौंपा।
भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को इस तरह निशाना बनाना और भारतीय नाविकों के जीवन को संकट में डालना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। पिछले तीन दिनों के भीतर इस क्षेत्र में किसी व्यापारिक जहाज पर अमेरिकी सेना द्वारा किया गया यह दूसरा हमला है, जिससे भारत की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
उधर अमेरिकी प्रशासन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे लापता भारतीय क्रू मेंबर्स के मुद्दे पर भारत सरकार के साथ सीधे और निरंतर संपर्क में हैं। हालांकि, इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा गलियारे के पास वाणिज्यिक सुरक्षा और मित्र देशों के बीच नागरिक सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
Updated on:
11 Jun 2026 02:50 pm
Published on:
11 Jun 2026 01:39 pm
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