ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जहां डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर को तबाह करने की धमकी दी है। इस युद्ध से पूरे खाड़ी क्षेत्र में खलबली मची हुई है और कुवैत से लेकर बहरीन तक इसके भयंकर झटके महसूस किए जा रहे हैं।
Conflict: अमेरिका और इजरायल का ईरान के खिलाफ जारी यह युद्ध अब बेहद खतरनाक स्तर पर जा पहुंचा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी है कि उनके बुनियादी ढांचों पर हमला तो अभी बस शुरू ही हुआ है। ट्रंप ने अपने एक कड़े बयान में ईरान को सीधे तौर पर 'पाषाण युग' में धकेलने की बात कही है। जिसके बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस कदम को एक 'विशाल युद्ध अपराध' और मानवता के लिए बड़ा खतरा बताया है। इस महायुद्ध की आग अब केवल ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कुवैत और बहरीन जैसे देशों तक फैल चुकी है।
जैसे-जैसे अमेरिका और इजरायल ने ईरान के प्रमुख पुलों और स्टील प्लांट्स को अपना निशाना बनाया है, वैसे-वैसे ईरान ने भी अपना आक्रामक रुख और तेज कर दिया है। ईरान की सेना ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिका से जुड़े अहम ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान ने कुवैत के आरिफजान कैंप और बहरीन में मौजूद एक बड़े एल्युमीनियम स्मेल्टर पर भारी बमबारी की है। हालांकि, कुवैत के जिस वाटर प्लांट और तेल रिफाइनरी पर हमले की बात हो रही है, ईरान ने उस पर सीधे तौर पर हमले से पूरी तरह इनकार किया है। यह अनियंत्रित होती स्थिति पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है।
डोनाल्ड ट्रंप की इस ताज़ा धमकी के बाद कि वे ईरान के पावर प्लांट और नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देंगे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच के पूर्व प्रमुख केनेथ रोथ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि अमेरिका नागरिक सुविधाओं जैसे पानी और बिजली के ठिकानों पर जानबूझकर हमला करता है, तो यह सीधा युद्ध अपराध माना जाएगा। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पहले ही यूक्रेन युद्ध में ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई कर चुका है, इसलिए अमेरिकी बयानों पर भी सवाल उठने लाजिमी हैं।
28 फरवरी से शुरू हुए इस ताज़ा और भयानक संघर्ष में अब तक बड़े पैमाने पर तबाही मच चुकी है। इजरायल और अमेरिका के साझा हमलों में ईरान के भीतर 2,000 से अधिक लोगों की दर्दनाक जान जा चुकी है, जबकि 26,500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुले तौर पर दावा किया है कि इस युद्ध में ईरान की 70 प्रतिशत स्टील उत्पादन क्षमता पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। ये भयावह आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह युद्ध और भी विकराल रूप ले सकता है।
इस पूरी घटना पर ईरानी विदेश मंत्रालय का कड़ा रिएक्शन आया है। उन्होंने अमेरिकी हमलों को 'आईएसआईएस' की शैली का खुला आतंकवाद करार दिया है। वहीं दूसरी ओर, शांति की उम्मीद में वेटिकन के पोप लियो XIV ने इजरायल के राष्ट्रपति से फोन पर बात की है और इस युद्ध को कूटनीति के जरिए जल्द से जल्द रोकने की अपील की है। आने वाले दिनों में यह देखना सबसे अहम होगा कि क्या अमेरिका सच में ईरान के जल और ऊर्जा संयंत्रों को पूरी तरह से नष्ट करने का कदम उठाता है या नहीं। इसके अलावा, ईरान ने जो मिसाइलें इजरायल की तरफ लगातार दागी हैं, उनका इजरायली डिफेंस सिस्टम (आयरन डोम) कैसे मुकाबला कर रहा है, इस पर भी पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
इस महायुद्ध का सीधा असर अब दुनिया की वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। इजरायल की अपनी अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा रही है और 112 अरब डॉलर से ज्यादा का भारी खर्च वहन करने के बाद वहां भी आंतरिक राजनीतिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच, जापान का एक एलएनजी टैंकर भी भारी सैन्य सुरक्षा के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरा है, जो दुनिया के सामने गहराते ऊर्जा संकट के खतरे को साफ दर्शाता है।