
अमेरिका और इजरायल का ईरान पर हमला। ( फोटो: Viral on X)
Military Operations: अमेरिका और इजरायल ने मिल कर ईरान के कई अहम ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए हैं यह कार्रवाई हाल के वर्षों में दोनों देशों का एक सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य अभियान है । इन हवाई हमलों में मुख्य रूप से ईरान के मिसाइल कारखानों, ड्रोन निर्माण केंद्रों और हथियार डिपो को निशाना बनाया गया है । राजधानी तेहरान सहित इस्फहान और अन्य प्रमुख शहरों में जोरदार धमाकों की गूंज सुनी गई है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बड़े घटनाक्रम ने एक नए युद्ध की चिंताओं को गहरा कर दिया है।
पश्चिमी तेहरान, इस्फहान और नतान्ज जैसे इलाकों में भारी विस्फोट हुए हैं। इन हवाई हमलों ने ईरान के रक्षा तंत्र और सैन्य बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि इस सैन्य अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन बनाने की क्षमता कम करना है। उनका कहना है कि इससे पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
इन सैन्य हमलों के बाद ईरान ने भी तुरंत पलटवार किया है। ईरानी रक्षा बलों ने इजरायल के कई सैन्य ठिकानों की ओर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य परिसरों को भी निशाना बनाने का प्रयास किया गया है। ईरान के इस आक्रामक रुख से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और तनाव चरम पर पहुंच गया है। दोनों ही पक्ष पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।
इस सैन्य टकराव का असर आम नागरिकों पर भी व्यापक रूप से पड़ा है। भारी गोलाबारी से तेहरान और कई अन्य शहरों में नागरिक बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ ऐतिहासिक इमारतों और संग्रहालयों को भी आंशिक क्षति हुई है। हालांकि, अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने बयान जारी कर स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्होंने केवल सैन्य ठिकानों को चुना है और किसी भी नागरिक क्षेत्र को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से तुरंत युद्धविराम की अपील की है। वहीं, यूरोपीय संघ ने भी स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ऊर्जा संयंत्रों पर भविष्य के हमलों को फिलहाल टाल दिया गया है, क्योंकि शांति वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर, ईरान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सख्त शर्तें रखी हैं। इस सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संकट गहरा गया है।
Updated on:
02 Apr 2026 02:44 pm
Published on:
02 Apr 2026 02:44 pm
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