
Iran War US Impact: ईरान युद्ध ने अमेरका को बुरी तरह तोड़ दिया है। इस युद्ध पर अब तक 38 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। अगर जंग जारी रही तो हर महीने 3 अरब डॉलर और जुड़ते जाएंगे। 20 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब अमेरिका का कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है।
इसका सीधा असर अमेरिका में आम आदमी की जेब पर पड़ा है, जिनका रोजमर्रा का बजट बिगड़ गया है। इस नुकसान की भरपाई ट्रंप सरकार तेल की कीमत बढ़ाकर कर रही है।
अमेरिका में डीजल का औसत दाम मंगलवार को रिकॉर्ड 6.27 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गया। छह महीने में ही पेट्रोल-डीजल पर अमेरिकियों ने 100 अरब डॉलर ज्यादा खर्च कर दिए। हर परिवार पर करीब 763 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
तेल की कमी ने खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ा दिए हैं। खेत से लेकर बाजार तक हर स्टेज पर असर पड़ा है। हालांकि ट्रंप ने तेल की कीमतों पर खुलकर कहा- जल्द ही यह कम होगी।
कांग्रेसनल बजट ऑफिस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हॉर्मुज स्ट्रेट में ईरानी नाकेबंदी से वैश्विक तेल सप्लाई ठप है। साथ ही अमेरिका के हथियार स्टॉक खाली पड़ रहे हैं। नई जंग छिड़ने पर सुरक्षा खतरा बढ़ सकता है।
अगस्त में राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर पार कर गया है। 30 साल के ट्रेजरी यील्ड 5.32 प्रतिशत पहुंच गए हैं, जो लगभग दो दशक में सबसे ऊंचा है। देश की वित्तीय हालत पर भारी दबाव बन रहा है।
इस बीच, नवंबर के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने महंगाई को बड़ा मुद्दा बनाया है। मिशिगन और मिनेसोटा जैसे राज्यों में प्रोग्रेसिव उम्मीदवारों की जीत से संकेत मिलता है कि जनता इस मुद्दे पर ध्यान दे रही है।
मंगलवार को कई डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट से अर्थव्यवस्था और महंगाई पर सवाल पूछे। उन्होंने ईरान जंग और तेल कीमतों को जिम्मेदार ठहराया। बेसेंट ने महंगाई का ठीकरा पिछले बिडेन प्रशासन पर फोड़ा और दावा किया कि ट्रंप के दौर में अमेरिकी बेहतर हालत में हैं।