विदेश

तबस के साथ जुड़ा है अमेरिका का पुराना दर्द, ओमान जाने के लिए यहां से ईरानी विदेश मंत्री ने पकड़ी फ्लाइट

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। आज ओमान के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तबस से फ्लाइट ली। जानिए ओमान जाने के लिए तबस क्यों चुना, आखिर तबस से कौन सा दर्द जुड़ा है अमेरिका का...

3 min read
Feb 06, 2026
अब्बास अराघची, ईरान के विदेश मंत्री (फोटो- X अकाउंट)

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। इस तनाव को कम करने के लिए ओमान के मस्कट में दोनों देशों के नेताओं और अधिकारियों की बैठक होने वाली है। ओमान में होने वाली मीटिंग से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सख्त चेतावनी दी है। अमेरिका की तरफ से कहा गया कि ईरान में हालात खराब हैं। ऐसे में अमेरिकी नागरिक जिनके पास दोहरी नागरिकता है, वह जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें। इधर, ओमान में होने वाली बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल होंगे। उन्होंने ओमान के लिए तबस से उड़ान भरी।

ये भी पढ़ें

ईरान के मुहांने पर जंगी बेड़ा खड़ा कर ट्रंप बोले- ‘हम बातचीत को हैं तैयार’

तेहरान से तबस क्यों गए अराघची

ओमान के मस्कट जाने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची तेहरान से तबस गए। दरअसल, तबस के साथ अमेरिका का एक पुराना दर्द जुड़ा है। ईरान में 1979 से पहले पहलवी वंश का शासन था। राजा शाह मोहम्मद रजा पहलवी अमेरिकी समर्थक थे। उनके शासनकाल में ईरानी तेल का कारोबार पूरी तरह से पश्चिमी दुनिया खासकर ब्रिटेन और अमेरिका के हाथों में था। जब ईरान में अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में जनवरी 1979 में इस्लामिक क्रांति हुई तो रजा शाह ईरान छोड़कर भाग गए। फरवरी में आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी 14 साल के निर्वासन से वापस लौटे और ईरान में इस्लामिक रीजिम की नींव पड़ी। इसी दौरान रजा शाह पहलवी ने अमेरिका में शरण ली। इस पर ईरान के पहले सुप्रीम लीड खुमैनी भड़क गए और उन्होंने अमेरिका को बड़ा शैतान बताया।

4 नवंबर 1979 की सुबह 500 से अधिक छात्रों ने ईरान की राजधानी तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास को घेर लिया। छात्रों की भीड़ दूतावास के अंदर घुस गई। उन्होंने गेट तोड़े और दूतावास के बाहर तैनात मरीन कमांडो को काबू किया फिर परिसर में मौजूद 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया। वह उन अमेरिकी नागरिकों के गलों में जूतों की माला पहनाकर बाहर लेकर आए, उन्होंने जासूस बताया। खुमैनी ने छात्रों की इस हरकत को दूसरी क्रांति करार दिया। कुछ दिनों बाद ईरानी रीजिम ने कुल 14 बंधकों को रिहा किया। बाकी के 52 अमेरिकी नागरिक ईरानी रीजिम के कैद में रहे।

गुप्त सैन्य मिशन हुआ फेल

उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने इसे आतंकवाद बताया। बंधकों की रिहाई को लेकर कूटनीतिक दवाब डाले गए। 14 नवंबर 1979 को अमेरिका ने ईरानी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बंधकों की रिहाई की मांग की, लेकिन ईरानी शासन ने अमेरिकी मांग को नजरअंदाज कर दिया। फिर अमेरिका ने गुप्त सैन्य अभियान की योजना बनाई। अप्रैल 1980 में ऑपरेशन ईगल क्लॉ लॉन्च किया गया। डेल्टा फोर्स के 118 सैनिकों को तेहरान के पास तबस रेगिस्तान में उतारा गया। यहां एक RH-53D हेलीकॉप्टर ईंधन भरने के लिए अतिरिक्त ईंधन ले जा रहे एक C-130 से टकरा गया, जिससे आग लग गई और 5 एयरमैन और 3 मरीन मारे गए। ईरान में इसे तबस में अल्लाह का चमत्कार करार दिया गया।

अगर बातचीत नाकाम रहती है तो ताकत का इस्तेमाल करें

इधर, ओमान में होने वाली बैठक को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत नाकाम होती है तो हम ताकत का इस्तेमाल करने के लिए भी तैयार हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि ट्रंप ओमान में होने वाली बातचीत का इंतजार कर रहे हैं। वह देखना चाहते हैं कि क्या कोई समझौता हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास जीरो परमाणु क्षमता होनी चाहिए। अगर बातचीत से नतीजा नहीं निकला तो राष्ट्रपति के पास कई विकल्प मौजूद हैं। अमेरिकी सेना ने कहा कि परशियन खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 3 का प्रमुख जहाज, न्यूक्लियर पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) अभियानों में लगा हुआ है।

Published on:
06 Feb 2026 02:15 pm
Also Read
View All

अगली खबर