
Employees march to Parliament House in Islamabad : पहले से कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान की सरकार की परेशानियां और बढ़ गई हैं। हजारों सरकारी कर्मचारियों ने इस्लामाबाद में वेतन सुधार, पेंशन सुरक्षा और सेवा संरचना में सुधार की मांग को लेकर संसद भवन तक एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने संघीय सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 17.5 ट्रिलियन रुपये के बजट की घोषणा से पहले यह प्रदर्शन किया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे पाकिस्तान से कर्मचारी सचिवालय चौक पर एकत्र हुए और फिर उन्होंने संसद भवन की ओर मार्च किया ताकि उनकी मांगों को नए बजट में शामिल किया जा सके। इस पर कर्मचारियों पर लाठीचार्ज किया गया।
ट्रिब्यून के अनुसार, अखिल सरकारी कर्मचारी महागठबंधन की ओर से आयोजित प्रदर्शन में शिक्षक, लिपिकीय कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी, तकनीकी कर्मचारी, श्रमिक प्रतिनिधि और पेंशनर सम्मिलित हुए। प्रदर्शन के नेताओं ने घोषणा की कि प्रतिभागी संसद भवन के बाहर तब तक धरना जारी रखेंगे जब तक सरकार औपचारिक रूप से उनकी मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती। कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करने से पहले वित्त मंत्रालय के बाहर दो दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने मार्च 2025 में किए गए वादे लागू करने की मांग की, जिसमें सभी तदर्थ राहत भत्तों को मूल वेतन में विलय करना और 2026 के लिए संशोधित वेतनमान लागू करना शामिल है।
उन्होंने निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों के वेतन में 50 प्रतिशत की वृद्धि, मकान किराया, चिकित्सा और परिवहन भत्तों में पर्याप्त वृद्धि और हाल ही में किए गए पेंशन सुधार रद्द करने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन इस्लामाबाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें रोक दिया, जिससे कर्मचारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। खबरों के अनुसार, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसकी प्रदर्शनकारियों और नेताओं ने आलोचना की।
एजेगा के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों पर चुनिंदा रूप से मितव्ययिता उपायों को लागू करने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि जहां अंतरराष्ट्रीय ऋणदाता आम सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि का विरोध करते हैं, वहीं निर्वाचित अधिकारियों और वरिष्ठ सांसदों को लगातार उदार वेतन वृद्धि मिल रही है। विरोध प्रदर्शन के नेताओं ने सरकार की खर्च प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए और एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, आर्थिक कठिनाई के दावों के बीच महंगे विमानों की खरीद का हवाला दिया।
बहरहाल, गठबंधन ने हाल के वर्षों में लागू किए गए पेंशन और अवकाश नकदीकरण सुधारों की भी आलोचना की है, उनका आरोप है कि इनसे सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति लाभों में बहुत कमी आई है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, एजीईजीए का कहना है कि इन उपायों ने हजारों परिवारों पर बढ़ता वित्तीय और मनोवैज्ञानिक दबाव डाला है, जिससे सरकार की आर्थिक नीतियों के प्रति असंतोष और भी तीव्र हो गया है। (इनपुट: ANI)