Islamic NATO Riyadh Meeting: ईरान तनाव के बीच रियाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई है।
Islamic NATO Riyadh Meeting: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मुस्लिम देशों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बीते गुरुवार को पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। मिडिल ईस्ट आई और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बैठक एक बड़े क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान अलग से आयोजित की गई थी। इसमें क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, खासकर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव के प्रभाव पर चर्चा हुई। देशों के बीच बेहतर समन्वय और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इन देशों के बीच एक ऐसे सुरक्षा ढांचे पर चर्चा हुई, जो नाटो जैसे औपचारिक सैन्य गठबंधन से अलग हो, लेकिन रक्षा सहयोग को बढ़ावा दे सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र, तकनीक और रणनीतिक तालमेल को मजबूत करना हो सकता है। हालांकि, इस तरह के किसी भी प्रस्ताव पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की पिछले एक साल से पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अंकारा इस संभावित ढांचे में मिस्र को शामिल करने के प्रयास कर रहा है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि क्षेत्रीय देशों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए।
सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तुर्की ने रक्षा उत्पादन, खासकर ड्रोन तकनीक में प्रगति की है, जबकि पाकिस्तान परमाणु क्षमता रखता है और सऊदी अरब रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है। ऐसे में, यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में क्षेत्रीय देश अपने स्तर पर समन्वय बढ़ाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह पहल किसी औपचारिक गठबंधन का रूप लेगी या नहीं, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम मध्य पूर्व की बदलती रणनीतिक दिशा की ओर संकेत करते हैं।