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हॉर्मुज को लेकर डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच क्या हुई बात? ईरान की अब बढ़ सकती है परेशानी

Strait of Hormuz open US China deal: अमेरिका और चीन ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खुला रखने पर सहमति जताई है, लेकिन ईरान की सुरक्षा को लेकर चीन दुविधा में है। जानिए इस डील का भारत पर क्या असर पड़ेगा और तेल की कीमतें कैसे प्रभावित होंगी।

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भारत

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Mukul Kumar

May 14, 2026

Xi Jinping And Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फोटो- ANI)

हॉर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद होने दुनिया भर पर बड़ा असर पड़ रहा है। अब इसे खोलने को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बातचीत हुई है।

खबरों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों ने हॉर्मुज को खुला रखने पर सहमति जताई है। व्हाइट हाउस ने इस बात की जानकारी दी है।

अब ये सहमति ईरान के लिए कितनी मुश्किल साबित हो सकती है? यह आने वक्त ही बताएगा, क्योंकि चीन ईरान का बड़ा आर्थिक साथी है और वो अपनी पार्टनर की सुरक्षा को दांव पर नहीं लगाना चाहेगा।

हॉर्मुज पर तनाव की असली कहानी

हॉर्मुज दुनिया के तेल और गैस का बहुत बड़ा रास्ता है। यहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल गुजरता है। हाल के घटनाक्रम में ईरान ने इस रास्ते पर कुछ नियम सख्त कर दिए थे, जिससे शिपिंग प्रभावित हुई। अमेरिका का कहना है कि कोई भी देश यहां टोल या टैक्स नहीं वसूल सकता।

अमेरिका और चीन के बीच हॉर्मुज को लेकर सहमति बनने की एक और वजह है। इस सहमति से चीन को ज्यादा फायदा है, क्योंकि इस रास्ते से उसका बहुत सारा तेल आता-जाता रहता है।

अगर रास्ता बंद रहा तो चीन की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। लेकिन चीन ईरान के साथ अपने रिश्तों को भी नहीं तोड़ना चाहता। ईरान चीन का बड़ा तेल सप्लायर है और दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी मजबूत है।

चीन की क्या है दुविधा?

चीन के लिए ये स्थिति काफी पेचीदा है। एक तरफ अमेरिका के साथ व्यापार और वैश्विक स्थिरता, दूसरी तरफ ईरान जैसा पुराना साथी को साथ लेकर चलना इस वक्त बड़ी चुनौती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ईरान पर दबाव तो डाल सकता है, लेकिन वो अपनी पार्टनर की संप्रभुता और सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करेगा।

ट्रंप प्रशासन चीन से उम्मीद कर रहा है कि वो ईरान को मनाए और रास्ता सामान्य हो जाए। आने वाले दिनों में ट्रंप और शी जिनपिंग की फिर से मुलाकात भी इसी मुद्दे पर हो सकती है। अमेरिका चाहता है कि कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर टोल न लगाए।

भारत के लिए क्यों मायने रखता है ये मुद्दा?

भारत भी हॉर्मुज से गुजरने वाले तेल पर निर्भर है। अगर रास्ता बंद रहा या टोल लगने लगा तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। हमारा देश ईरान से भी तेल खरीदता रहा है, हालांकि हाल के सालों में अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ये कम हुआ है।

ऐसे में अमेरिका-चीन की सहमति भारत के लिए राहत की खबर हो सकती है। लेकिन अगर ईरान के साथ कोई बड़ा टकराव हुआ तो पूरा इलाका अस्थिर हो जाएगा। खाड़ी देशों से आने वाला तेल और गैस हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

ईरान का रुख और संभावनाएं

उधर, ईरान कह रहा है कि वो अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। उसने कुछ जहाजों पर नए नियम लागू किए हैं। अब सवाल ये है कि क्या चीन ईरान को समझा पाएगा? या फिर दोनों बड़े देश मिलकर कोई नया रास्ता निकालेंगे?

विश्लेषकों का मानना है कि चीन अमेरिका से कुछ रियायतें भी मांग सकता है, जैसे ताइवान या व्यापार संबंधी मुद्दों पर। ये सब डिप्लोमेसी का खेल है, जहां हर देश अपने हित देख रहा है।