Middle East Tension: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने अपनी जमीनी सेना भेजने से मना कर दिया है। इस फैसले ने अमेरिका के साथ इजरायल के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है।
Geopolitical Crisis : इज़रायल और ईरान (Iran-Israel Conflict) के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। ताज़ा अंतरराष्ट्रीय मीडिया इनपुट्स के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की सरकार ने ईरान के भीतर जमीनी सैन्य कार्रवाई (Ground Operation) करने से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। यह फैसला न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि इसने जो बाइडन (Joe Biden) प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इज़रायल ने अंतिम समय पर योजना बदल कर अमेरिका (United States) को बड़े संकट में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टस की मानें तो ईरान की जवाबी कार्रवाई की तैयारी देखकर इज़रायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने अपनी रणनीति बदल ली है।
इज़रायल के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की भौगोलिक स्थिति और उसकी मिसाइल क्षमता (Missile Power) किसी भी जमीनी सेना के लिए कब्रिस्तान साबित हो सकती है। ईरान ने अपनी सीमाओं पर हज़ारों 'कामिकेज़' ड्रोन्स और लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की हैं। इस घेराबंदी ने इज़रायल को मजबूर किया है कि वह केवल हवाई हमलों तक सीमित रहे और अपने सैनिकों को सीधी मौत के मुंह में न झोंके।
वाशिंगटन से आ रही खबरें बताती हैं कि अमेरिका चाहता था कि इज़रायल एक निर्णायक जमीनी कार्रवाई करे, ताकि ईरान के परमाणु केंद्रों को जड़ से खत्म किया जा सके। हालांकि, इज़रायल ने ऐन वक्त पर अपनी सेना भेजने से मना कर दिया। इसे अमेरिका के साथ एक बड़े रणनीतिक धोखे के तौर पर देखा जा रहा है। व्हाइट हाउस अब इस बात से चिंतित है कि इज़रायल की इस हिचकिचाहट से ईरान के हौसले और बुलंद हो जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया हाउस के मुताबिक, तेहरान ने गुप्त रूप से अपनी 'फतेह' मिसाइलों को लॉन्च पैड पर सेट कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि इज़रायल का एक भी बूट ईरानी जमीन पर पड़ा, तो ईरान न केवल इज़रायल बल्कि पूरे मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। इसी 'चेकमेट' वाली स्थिति ने इज़रायल को डिफेंसिव मोड में ला दिया है।
इज़रायल के इस कदम ने यह साफ कर दिया है कि वह एक पूर्ण स्तर के युद्ध (Full-scale War) की कीमत चुकाने के लिए तैयार नहीं है। वहीं, लेबनान और यमन के प्रॉक्सी समूह भी इस मौके का फायदा उठाकर इज़रायल पर दबाव बना रहे हैं। फिलहाल, पूरा विश्व इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि अमेरिका अब इस स्थिति को कैसे संभालता है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इज़रायल का पीछे हटना उसकी कमजोरी नहीं बल्कि एक सोची-समझी चाल भी हो सकती है, ताकि वह ईरान को किसी अन्य तरीके से घेर सके। आने वाले 48 घंटों में अमेरिकी विदेश मंत्री का इज़रायल दौरा हो सकता है, जहाँ इस सैन्य रणनीति और मतभेदों पर आमने-सामने बात होगी। इस तनाव के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की संभावना है, जिसका असर भारत सहित दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।