
US-Iran Peace Deal : अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब खत्म हो गई है। दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने युद्ध खत्म करने को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। फ्रांस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने MoU पर हस्ताक्षर करने के बाद मीडिया को चिल्लाकर बताया था कि हस्ताक्षर हो गए हैं। अमेरिका के इस कदम से इजरायल में नाराजगी है। CNN ने एक इजरायली अधिकारी के हवाले रिपोर्ट किया है कि पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को ईरान के इरादों पर भरोसा नहीं है। नेतन्याहू का मानना है कि ईरानी रीजिम अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक को शायह ही माने।
CNN ने कहा कि नेतन्याहू वाशिंगटन में कंजर्वेटिव मीडिया के लोगों और इजरायली लॉबी के जरिए संसद में बहस को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इजरायली समर्थक पॉडकास्टर मार्क लेविन ने कहा कि इस का कोई मतलब नहीं बनता है। ईरान के पुनर्निमाण पैकेज को उन्होंने स्लश फंड बताया।
अमेरिकी मीडिया ने कहा कि नेतन्याहू वाशिंगटन में अपने दोस्त सीनेटरों पर भी भरोसा कर सकते हैं। हालांकि, यह मुश्किल हो सकता है। क्योंकि कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पहले ईरान पर बमबारी का समर्थन किया था। लेकिन बाद में वह शांति समझौते की बात करने लगे। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी पहले युद्ध के समर्थक थे, लेकिन बाद में वह भी शांति समझौते की बात करने लगे।
अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते में लेबनान में भी सैन्य कार्रवाई रोकने की बात कही गई है, लेकिन इजरायल इस समझौते का सिग्नेटरी नहीं है। नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायल खुद को अमेरिका-ईरान समझौते से बंधा हुआ नहीं मानता है। शांति समझौते की घोषणा के बाद पीएम नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल को ईरान के एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस से खतरा बना हुआ है। क्योंकि शांति समझौते में हिजबुल्लाह या शिया मिलिशिया को ईरानी समर्थन बंद करने की बात कहीं भी नहीं कही गई है।
उन्होंने कहा कि इन खतरों से निपटने के लिए हमने गाजा, लेबनान और सीरिया में सिक्योरिटी जोन बनाए हैं। इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि ये सिक्योरिटी जोन अनिश्चितकाल तक के लिए रहेंगे। ताकि यहुदियों को जिहादियों से बचाया जा सके। वहीं, शांति समझौते के बाद भी इजरायल का लेबनान के हिजबुल्लाह समर्थित इलाकों में हमले जारी हैं। बीते दिनों इजरायली हमले में तीन लोग मारे गए।