
Jaishankar UNGA Speech: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में वैश्विक मंच से सीमा-पार राज्य-प्रायोजित आतंकवाद की कड़ी निंदा की और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए नई दिल्ली के अटूट संकल्प को दोहराते हुए गलत प्रचार का करारा जवाब दिया।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, कल आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले एक देश ने इस सभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। आतंकवाद को सामान्य बताने और इसके नतीजों से बचने के लिए तर्क दिए गए। यह सब नहीं चलेगा। उन्होंने साफ कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकती।
इस्लामाबाद की चालबाजियों को बेनकाब करते हुए और पाकिस्तान को दोहरे चरित्र वाले 'दुष्ट देश' के रूप में उजागर करते हुए, जयशंकर ने उन देशों की तीखी आलोचना की जो वैश्विक सच्चाई को तोड़ने-मरोड़ने और चरमपंथियों के लिए सुरक्षित पनाहगाहों को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
वैश्विक आतंकी नेटवर्क के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख को स्पष्ट करते हुए जयशंकर ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बिना किसी अपवाद के राज्य-समर्थित आतंकी संगठनों को खत्म करना चाहिए, और आतंकवाद के वित्तीय पहलुओं को उजागर कर उनका मुकाबला किया जाना चाहिए।
इस दृढ़ संकल्प की झलक तब भी दिखी जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया। भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने शरीफ की बातों को "अजीब" बताते हुए याद दिलाया कि 9/11 का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की मुख्य अकादमी के ठीक पास रह रहा था।
शरीफ ने कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए 2025 के संघर्ष में ट्रंप की मध्यस्थता का श्रेय लेने की कोशिश की, जिसे भारत ने पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान दिन में सुरक्षा बनाए रखने का दावा करता है और रात में आतंकवाद फैलाता है।
गहलोत ने कहा, "हमने पिछले साल दिखाया था कि आतंकवादियों के पास भागने या छिपने की कोई जगह नहीं। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद जारी रखने के नतीजे भुगतने होंगे।" उल्लेखनीय है कि पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को उसकी असलियत में समझने की अपील की है।