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खुशखबरी ! अमेरिका की H1-B visa सख्ती के बाद जर्मनी ने खोले रोजगार के द्वार, भारतीयों के लिए सुनहरा मौका

Jobs in Germany for Indians: जर्मनी ने भारतीय पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए वीज़ा नीतियों को सरल बनाया है। वहीं अमेरिका की H1-B वीज़ा सख्ती के कारण जर्मनी अब नए अवसरों का केंद्र बन रहा है।

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Sep 24, 2025
जर्मनी में भारत के राजदूत फिलिप एकरमैन। (फोटो: एएनआई)

Jobs in Germany for Indians: भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बहुत अच्छी खबर है! अब सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि जर्मनी भी तकनीक, आईटी और विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वालों को आकर्षित कर रहा है। अमेरिका की वीज़ा नीतियों में हालिया बदलाव और H1-B वीज़ा फीस में बढ़ोतरी के बीच, जर्मनी ने भारतीयों को खुला निमंत्रण (Germany jobs for Indians) दिया है। जर्मनी में भारत के राजदूत फिलिप एकरमैन (Philip Ackerman) ने इस संबंध में बड़ा बयान (Germany Vs USA immigration 2025)दिया है। उन्होंने कहा कि जर्मनी की स्थिर, पारदर्शी और आधुनिक वीज़ा प्रणाली भारतीय पेशेवरों के लिए (Indian professionals in Germany) एक आदर्श माहौल देती है। खासकर आईटी, इंजीनियरिंग, साइंस, रिसर्च और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में भारतीयों के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जर्मनी में काम कर रहे कई भारतीय स्थानीय लोगों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और औसतन अधिक वेतन भी कमा रहे हैं।

जर्मन वीज़ा सिस्टम: तेज, भरोसेमंद और स्थिर(Germany visa for Indian workers)

जर्मन राजदूत ने अपने देश की वीज़ा नीतियों की तुलना जर्मन कारों से करते हुए कहा, "हमारी वीज़ा प्रणाली तेज, सीधी और भरोसेमंद है।" उनका मानना है कि यहां नीतियों में बार-बार बदलाव नहीं होते, जिससे विदेशी कामगारों को एक सुरक्षित और स्थिर करियर प्लान करने का मौका मिलता है। यह अमेरिका की जटिल और अस्थिर नीति के मुकाबले एक बड़ा लाभ है।

अमेरिका में H1-B वीज़ा विवाद: भारतीय आईटी कंपनियों पर असर (Jobs abroad for Indian IT engineers)

दूसरी ओर, अमेरिका में H1-B वीज़ा को लेकर नई बहस चल रही है। हाल ही में वीज़ा फीस में बढ़ोतरी और सख्त नियमों ने भारतीय आईटी कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे भारत के 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के सेवा निर्यात उद्योग को नुकसान हो सकता है। पहले ही अमेरिकी संरक्षणवाद की वजह से भारत की कंपनियां वहां संघर्ष कर रही हैं।

व्हाइट हाउस का तर्क: अमेरिकी नौकरियों पर असर

अमेरिका सरकार का दावा है कि H1-B वीज़ा की वजह से स्थानीय अमेरिकियों की नौकरियों और वेतन पर असर पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2000 से 2019 तक अमेरिका में विदेशी STEM वर्कर्स की संख्या 1.2 मिलियन से बढ़कर 2.5 मिलियन हो गई, जबकि इसी दौरान STEM नौकरियों में केवल 44.5% की बढ़ोतरी हुई।

अब भारतीयों के लिए जर्मनी क्यों है बेहतर विकल्प ?

इन सबके बीच, जर्मनी भारतीयों को एक स्थायी, स्पष्ट और स्वागत योग्य माहौल प्रदान कर रहा है। यूरोप के बीचों-बीच स्थित जर्मनी न केवल करियर की दृष्टि से, बल्कि जीवन स्तर और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से भी एक शानदार विकल्प बनकर उभर रहा है। भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए यह एक नया और सुरक्षित करियर डेस्टिनेशन बन सकता है।

अमेरिका की सख्ती से डरें नहीं, जर्मनी है तैयार

बहरहाल अगर आप एक आईटी या तकनीकी क्षेत्र से जुड़े भारतीय प्रोफेशनल हैं, तो अब अमेरिका के विकल्प के रूप में जर्मनी को गंभीरता से विचार में लें। यहां न केवल वीज़ा प्रक्रिया आसान है, बल्कि करियर ग्रोथ, वेतन और जीवनशैली के शानदार अवसर भी हैं।

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