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Kharg Island Iran Attack: अमेरिका के खर्ग द्वीप पर हमले से चीन में क्यों मचा हड़कंप, पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें

Kharg Island Iran Attack: ईरान के खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले से वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई। चीन में ईंधन संकट की आशंका से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं।

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Mar 15, 2026
Kharg Island Iran Attack (Image Source: ChatGPT)

Kharg Island Iran Attack: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के रणनीतिक खर्ग द्वीप (Kharg Island) पर अमेरिकी हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और एशियाई देशों को चिंता में डाल दिया है। इस घटना के बाद खास तौर पर चीन में ईंधन आपूर्ति को लेकर घबराहट देखी गई और कई जगह लोगों ने पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगा दीं।

खर्ग द्वीप ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर सीधे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।

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खर्ग द्वीप क्या है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

खर्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का एक छोटा लेकिन अत्यंत रणनीतिक द्वीप है। यह ईरान के बुशेहर तट से लगभग 25-30 किलोमीटर दूर स्थित है और इसका क्षेत्रफल करीब 20 वर्ग किलोमीटर है।

इस द्वीप का महत्व इसलिए बहुत अधिक है क्योंकि ईरान के लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। यहां विशाल तेल भंडारण टैंक हैं, जिनमें करीब 30 मिलियन बैरल तेल संग्रहित किया जा सकता है। गहरे समुद्री बंदरगाह के कारण यहां से बड़े-बड़े सुपरटैंकर सीधे तेल लोड कर सकते हैं। इसी वजह से खार्ग द्वीप को अक्सर ईरान की 'ऑयल लाइफलाइन' कहा जाता है।

अमेरिकी हमले में क्या हुआ?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप पर कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में मिसाइल स्टोरेज, माइन डिपो और अन्य सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि तेल निर्यात से जुड़ी मुख्य ऊर्जा सुविधाओं को सीधे निशाना नहीं बनाया गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा था, खासकर तब जब होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर तनाव बढ़ रहा है।

चीन में क्यों मच गया हड़कंप?

चीन दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और ईरान उसके लिए महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ताओं में से एक है।

ईरान से प्रतिदिन 10-15 लाख बैरल तेल का निर्यात होता है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। चीन की कई निजी रिफाइनरियां सस्ते ईरानी तेल पर निर्भर रहती हैं। खार्ग द्वीप पर किसी भी खतरे का मतलब है कि ईरानी तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है। इसी आशंका के चलते चीन में कई जगह लोगों ने जल्दबाजी में ईंधन भरवाना शुरू कर दिया, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं।

वैश्विक तेल बाजार पर संभावित असर

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खर्ग द्वीप की तेल सुविधाओं को गंभीर नुकसान होता है तो इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति कम हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

चूंकि ईरान के अधिकांश तेल निर्यात का केंद्र यही द्वीप है, इसलिए यहां किसी भी बड़े व्यवधान का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि यह टर्मिनल पूरी तरह प्रभावित होता है तो वैश्विक बाजार से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल की आपूर्ति कम हो सकती है, जिससे खास तौर पर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

होर्मुज स्ट्रेट से भी जुड़ा है संकट

खर्ग द्वीप के पास स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। इस रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका प्रभाव और गंभीर हो सकता है।

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