
ईरान (Iran) पर अमेरिका (United States of America) के हमले का जवाब देने के लिए आईआरजीसी - इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC - Islamic Revolutionary Guard Corps) ने बहरीन (Bahrain) और कुवैत (Kuwait) पर एयरस्ट्राइक्स की है। आईआरजीसी मिसाइलों और ड्रोन्स से हमले कर रही है। इसके बाद कुवैत ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है।
एयरस्पेस बंद करने के बाद कुवैत सिविल एविएशन अथॉरिटी ने सभी कमर्शियल उड़ानें रद्द कर दी हैं। इसके साथ ही आने वाली उड़ानों को पड़ोसी देशों में डायवर्ट कर दिया गया है। ईरानी हमलों की वजह से मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने जानकारी दी है कि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स के खिलाफ उनकी रक्षात्मक कार्रवाई जारी है। इसके लिए उनके एयर डिफेंस सिस्टम्स एक्टिव हैं और ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को इंटरसेप्ट कर रहे हैं।
आईआरजीसी ने कुवैत और बहरीन में अमेरिका के 18 सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस और अहमद अल जाबेर एयरबेस के साथ ही बहरीन का शेख ईसा एयरबेस भी शामिल हैं। आईआरजीसी ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स का इस्तेमाल करते हुए इन ठिकानों पर हमले किए। ईरानी मीडिया के अनुसार इन हमलों में अमेरिकी कमांड सेंटर्स, फाइटर जेट्स हैंगर, ड्रोन बेस और सैन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अभी भी ईरानी हमले जारी हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर हमलों का सिलसिला शुरू होने से मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ गया है। अमेरिका ने लगातार दो दिन ईरान पर हमले किए और ईरान भी चुप नहीं बैठा और मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले किए। अमेरिकी हमलों की वजह से ईरान के सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा, तो मिडिल ईस्ट में कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों पर ईरान के हमलों की वजह से इन देशों में भी सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है, जिसका असर अमेरिका पर पड़ रहा है, क्योंकि इन सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिकों की तैनाती, फाइटर जेट्स, अन्य हथियारों, कमांड सेंटर्स के लिए होता है। इस वजह से ईरान इन देशों को निशाना बना रहा है और अगर अमेरिकी हमले जारी रहे, तो ईरान इसी तरह अपनी जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा और मिडिल ईस्ट में इस तरह के कई हमले देखने को मिलेंगे।