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ईरान की दादागिरी पर लगाम! मैक्रों और सऊदी क्राउन प्रिंस MBS ने मिलाया हाथ; हॉर्मुज को लेकर दी बड़ी चेतावनी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मध्य-पूर्व में तनाव पर चर्चा की और लेबनान तक संघर्ष-विराम के विस्तार का आह्वान किया।
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Apr 11, 2026
Macron Saudi Crown Prince
Macron Saudi Crown Prince

Strait of Hormuz Crisis: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने ईरान के हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की कोशिशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए संयुक्त प्रयास शुरू कर दिए हैं। दोनों नेताओं ने फोन पर बातचीत कर हॉर्मुज में मुक्त नौवहन सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने पर जोर दिया है।

हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव चरम

ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव चरम पर पहुंच गया था, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ईरान की ओर से नेविगेशन पर पाबंदी और धमकियों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी। इस स्थिति में फ्रांस और सऊदी अरब ने मिलकर ईरान को साफ चेतावनी दी है।

मैक्रों ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, 'सभी पक्षों के लिए अब यह अत्यंत जरूरी है कि वे ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों पर रोक लगाएं और ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करे।'

15 देशों का गठबंधन तैयार

फ्रांस के नेतृत्व में 15 से अधिक देश हॉर्मुज में यातायात बहाल करने के लिए रक्षा मिशन की योजना बना रहे हैं। मैक्रों ने कहा कि यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक होगा और ईरान के साथ समन्वय में चलाया जाएगा। सऊदी क्राउन प्रिंस MBS के साथ हुई बातचीत में भी दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई।

विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और फ्रांस का यह कदम ईरान की बढ़ती दादागिरी को काउंटर करने के लिए महत्वपूर्ण है। खाड़ी देशों ने पहले ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन चीन और रूस ने वीटो कर दिया था। अब फ्रांस के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय गठबंधन वैकल्पिक रणनीति के रूप में उभर रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

हॉर्मुज बंद होने की स्थिति में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इस खतरे को देखते हुए मैक्रों और MBS ने तत्काल कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि मुक्त नौवहन न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून का भी पालन है।
ईरान-इजरायल युद्धविराम के बावजूद हॉर्मुज का मुद्दा पूरी तरह सुलझा नहीं है। ऐसे में फ्रांस-सऊदी गठजोड़ क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में नया मोड़ ला सकता है।

Updated on:
11 Apr 2026 10:55 pm
Published on:
11 Apr 2026 10:55 pm