
मार्क ज़ुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) की कंपनी मेटा (Meta) जो फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और वॉट्सऐप (WhatsApp) की पेरेंट कंपनी है, यह दावा करती है कि वो अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए जमकर पैसा खर्च कर रही है। लेकिन सच कुछ और ही है। कंपनी ने भारत सरकार (Indian Government) के सामने स्वीकार किया है कि खास तरह के कंटेंट को उसके प्लेटफॉर्म पर 'बूस्ट' (ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने) के लिए बड़ी रकम चुकाई गई है। मेटा पर सकाम विज्ञापनों से कमाई के आरोप लगते रहे हैं। दो अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार मेटा सालाना विज्ञापन राजस्व का लगभग 10% हिस्सा और लगभग 7 बिलियन डॉलर की कमाई स्कैम विज्ञापनों से कर रही है।
नवंबर 2025 में मेटा के गोपनीय आंतरिक दस्तावेजों के आधार पर एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कंपनी ने अनुमान लगाया था कि वो अपने कुल सालाना विज्ञापन राजस्व का लगभग 10% हिस्सा स्कैम (धोखाधड़ी) और प्रतिबंधित सामानों के विज्ञापनों से कमा रही है। कंपनी ने यह भी माना है कि वो ऐसे विज्ञापनों को रोकने में नाकाम रही।
एक रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2024 के एक दस्तावेज में दावा किया गया कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर हर दिन करीब 15 बिलियन 'हाई-रिस्क' (उच्च जोखिम वाले) स्कैम विज्ञापन दिखाए जा रहे थे। कंपनी की कंटेंट फिल्टर प्रणाली में कमी होने के कारण कंपनी तभी कार्रवाई करती थी, जब उसकी स्वचालित प्रणाली को धोखाधड़ी का कम से कम 95% यकीन हो जाता था।
इन मीडिया रिपोर्ट्स पर उस समय मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन (Andy Stone) ने कहा था कि मीडिया के पास मौजूद दस्तावेज कंपनी के कामकाज की चुनिंदा और भ्रामक तस्वीर पेश करते हैं। कंपनी ने यह आकलन इसलिए किया था जिससे तय किया जा सके कि धोखाधड़ी और स्कैम रोकने के लिए किन सुरक्षा उपायों में निवेश बढ़ाना है। कंपनी ने बाद में ऐसे निवेश किए भी किए थे।
एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री वाले वीडियो भी बेचे जा रहे थे। यह एक चिंताजनक विषय है।