Iran War:ईरान के हमलों के बाद सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से मुलाकात की है। दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान जल्द ही इस अरब युद्ध में शामिल हो सकता है।
Saudi Arabia : मध्य पूर्व (Middle East) में भड़की जंग की आंच अब सीधे तौर पर दक्षिण एशिया तक पहुंचने लगी है। ईरान ओर से सऊदी अरब (Saudi Arabia) के अरामको (Aramco) तेल क्षेत्रों और सैन्य अड्डों पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों (Iran War) के बाद, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और पाकिस्तानी सेना प्रमुख (Army Chief) जनरल आसिम मुनीर के बीच रियाद में एक अहम बैठक हुई है। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात ने पूरी दुनिया में यह सवाल खड़ा कर दिया है: क्या पाकिस्तान (Pakistan Army) अब इस अरब जंग में सीधे तौर पर कूदने वाला है?
इस पूरी हलचल के केंद्र में सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ 'सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता' (Strategic Mutual Defence Agreement) है। इस डील के मुताबिक, "एक देश पर हमला, दोनों पर हमला माना जाएगा।" सऊदी रक्षा मंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बैठक की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरानी हमलों और इस रक्षा समझौते के तहत उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा की है। चूंकि ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस और शेबा ऑयल फील्ड को निशाना बनाया है, इसलिए सऊदी अरब अब पाकिस्तान से सैन्य मदद और सुरक्षा की उम्मीद कर रहा है।
भारत के जाने-माने रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी (Brahma Chellaney) ने अपने ट्विटर (X) अकाउंट से इस गठजोड़ की तीखी आलोचना की है। उन्होंने सऊदी-पाक समझौते को "ट्रबलिंग एक्सिस" (परेशान करने वाली धुरी) करार दिया है। अपने एक ट्वीट में चेलानी ने लिखा था, "यह आतंक के समर्थकों की धुरी है: सऊदी अरब (जिसे कभी ट्रंप ने दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद का फाइनेंसर कहा था) और पाकिस्तान (दुनिया का सबसे कुख्यात स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म) ने रक्षा समझौता किया है।" चेलानी के मुताबिक, सऊदी अरब अपनी ताकत दिखाने के लिए पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी का फायदा उठा रहा है और बदले में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अपने लिए 'इंश्योरेंस' (बीमा) के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।
अरब वेबसाइट्स के अनुसार, सऊदी अरब ने हाल ही में 14 से ज्यादा ईरानी ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया है। खाड़ी देश ईरान के इस आक्रामक रवैये के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं और पाकिस्तान से अपनी दोस्ती का कर्ज चुकाने की मांग कर रहे हैं।
पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार पाकिस्तान दोराहे पर खड़ा हुआ है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इस्हाक डार ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने अपनी कूटनीति से ईरान को सऊदी अरब पर बड़े हमले करने से रोका है। पाकिस्तान एक तरफ सऊदी के भारी कर्ज तले दबा हुआ है, तो दूसरी तरफ उसकी 4 करोड़ से ज्यादा की शिया आबादी उसे इस जंग में सीधे उतरने से रोक रही है।
उधर ईरानी मीडिया और अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब या किसी भी पड़ोसी देश ने अपनी जमीन या एयरस्पेस का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए होने दिया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ईरान जानता है कि पाकिस्तानी सेना को उलझाना पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान इस समय सऊदी अरब के फंड पर ही जिंदा है। लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के साथ सीमा विवाद और घरेलू मोर्चे पर भारी अस्थिरता के बीच, ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरना पाकिस्तान के लिए 'अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने' जैसा होगा। देखना यह है कि जनरल आसिम मुनीर अरब देशों के दबाव में आकर अपनी फौज को इस विनाशकारी आग में धकेलते हैं या कूटनीति का सहारा लेकर खुद को बचाते हैं।